संभल। शब-ए-बरात का त्योहार अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। घरों और मस्जिदों में कुरान की आयतें गूंजी। दुनिया से कूच कर गए लोगों के लिए मगफिरत की दुआ की गई और कब्रिस्तानों में दफन नातेदारों की कब्रों पर फातिहा पढ़ी गई।
मंगलवार को शब ए बरात के पर्व पर नियाज नजर के बाद पुरखों की फातेहा पढ़ी। घरों-मस्जिदों, इमाम बारगाहों को सजाकर मस्जिदों में विशेष इबादत अदा की गई। उलमा ने बताया कि इस रात की इबादत का सवाब सैकड़ों रातों की इबादत से ज्यादा है। अल्लाह इस रात गुनाहों से तौबा करने वालों के गुनाह माफ कर देता है। मुफ्ती आलम रजा नूरी ने कहा कि इस्लाम में तीन रातें बहुत अफजल हैं। इनमें शब ए मेराज, शब ए कद्र और शब ए बरात की रात शामिल हैं। इसमें शब ए बरात की रात गुनाहों से मुक्ति की रात है।
सिरसी में मौलाना एहतेशाम अली, काजी हुसैन रजा, मौलाना मीसम अब्बास मुजफ्फरनगरी, मौलाना शमीम, सुब्हान, इकरार रजा, असगर, नजमी, महजर ने भी शब ए बरात की फजीलत बयान की। शब ए बरात पर घरों में सूजी व चने की दाल का हलवा बनाया गया और मसूर की दाल पकाई गई। शाम होते ही बच्चों ने फुलझड़ियां और पटाखे छोड़े। देर रात तक शहर से लेकर देहात तक इबादत का सिलसिला चलता रहा।