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...जहां सांप-बिच्छू भी किसी को नहीं पहुंचाते नुकसान

Fri, 03 Mar 2017 12:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
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चंडीगढ़ में योगा टीचर्स का ओरियंटेशन कोर्स - फोटो : अमर उजाला
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 जनेटा शरीफ की रूहानी खुशबू दूर-दूर तक फैली है। यहां की खूबियाें को लेकर क्षेत्र ही नहीं दूसरे जिलों में भी चर्चा रहती है। यहां की तरह-तरह की कहानियां लोगों में प्रचलित हैं। बताया जाता है कि, यहां सांप-बिच्छू भी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। हर कोई यहां उर्स में मन्नत मांगने आता है।
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जनेटा शरीफ के सज्जादानशीं हजरत डा.सैयद शाहिद मियां कादरी चिश्ती नौशाही ने बताया कि, बात करीब तीन सौ सालों से अधिक पुरानी है, ईराक से कुछ बुजुर्ग सक्खर (पाकिस्तान) आए। वहां मिंट कुंमरी में उनकी जागीरदारी थी। वहां से एक बुजुर्ग दिल्ली आए। किंवदंती है कि, यहां पीरो मुर्शिद से हुक्म मिला कि वह वन क्षेत्र (जनेटा) जाएं। क्योेंकि यहां उस दौर में जिन्नात का कब्जा था। जो मानवता को नुकसान पहुंचा रहे थे।

वह बुजुर्ग हजरत  सैयद मोअज्जम शाह (र.अलेहि.) जनेटा आए। यहां रहने का स्थान बनाया। यहां से जिन्नों को भगाया। जिससे लोग जुड़ते चले गए। जिन्न के हटने के कारण यहां गांव की संगे बुनियाद रखी गई, जिसका नाम जिन हटा पड़ा, जिसे बाद में जनेटा कहा जाने लगा।
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अब यहां उन्हीं दरवेश का आस्ताना है, जिसमें उत्तर भारत के कई राज्यों, जिलों के लोग आस्था रखते हैं। इस बार यहां छह मार्च से नौ मार्च तक जनेटा शरीफ का उर्स आयोजित किया जाएगा। यहां आज भी सांप बिच्छू किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।
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