संभल जिले में बुखार का प्रकोप लगातार जारी है। असमोली ब्लॉक क्षेत्र के गांव देहरी जग्गू लक्ष्मी कुमारी (18) पुत्री खेम सिंह की डेंगू से मौत हो गई। जबकि गांव शफातनगर में बुखार से जायदा (48) पत्नी शाकिर अली की मौत हो गई। इन गांवों समेत सलखना में टाइफाइड, मलेरिया के साथ डेंगू पैर पसार रहा है पर जिम्मेदार शिविर लगवाकर दवा देने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।
गांव में डेंगू मिलने पर प्रधान को जिम्मेदार ठहराया है। कार्रवाई का भी प्रावधान है। देहरी जग्गू निवासी खेम सिंह की बेटी लक्ष्मी की मौत से परिवार के लोग गमजदा हैं। पिता खेम सिंह ने बताया कि बेटी बीए द्वितीय वर्ष में थी। एक सप्ताह पहले बुखार आने पर उसे मुरादाबाद के निजी अस्पताल में ले गए थे। यहीं पर हुई जांच में उसे डेंगू की पुष्टि हुई।
इसके बाद पाकबड़ा स्थित टीएमयू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार की रात तीन बजे करीब उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। मां गंगा देई का रो रोकर बुरा हाल हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में फिलहाल 30 से 40 ग्रामीण बुखार से अब भी जूझ रहे हैं।
उधर, गांव शफातनगर में जायदा के पति शाकिर अली ने बताया कि दो दिन पहले बुखार आया था तो पहले गांव में ही दवा दिलाई। हालत बिगड़ी तो मुरादाबाद ले गए। जहां मौत हो गई। इसी गांव में मुन्ना खां के परिवार में छह लोग डेंगू से पीड़ित हैं। उनके बेटे सलीम जावेद की बेटी रिदा फात्मा को डेंगू है।
संभल के निजी अस्पताल में भर्ती है। सलीम जावेद ने बताया कि जांच कराने पर डेंगू की पुष्टि हुई थी। अब उपचार चल रहा है। बताया कि भतीजे नसर अहमद को भी डेंगू है। वहीं, भाई बहन तारा बी और नदीम अहमद भी डेंगू से पीड़ित हैं। महमूदपुर माफी में उपचार करा रहे हैं।
गांव की राशन डीलर मोनिका भी टाइफाइड से पीड़ित हैं। गांव में ही अपना उपचार करा रही हैं। वहीं, गांव के ही मोहम्मद शान, प्रेमशंकर, किरनपाल, अक्षर पाल भी टाइफाइड से पीड़ित हैं। संभल ब्लॉक क्षेत्र के गांव सलखना निवासी अतुल ने बताया कि मेरे पिता महेंद्र सिंह और बहन निशा को डेंगू है।
इसी गांव के छोटे के चार बच्चे डेंगू से पीड़ित हैं। एक बेटी प्रियांशी की बुखार से कुछ दिन पहले मौत हो चुकी है। परिवार में सभी लोग बीमार होने से डर का माहौल है। गांव कुतुबपुर सक्ता में ममता (38) पत्नी देवेंद्र की बुखार से मौत हो गई। देवेंद्र ने बताया कि तीन दिन पहले बुखार आया था।
गांव में ही दिखाया। रविवार की सुबह में तबीयत ज्यादा खराब हुई है तो सैदनगली ले गए। वहां पर उपचार के दौरान मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सफाई व्यवस्था और लगातार फॉगिंग कराई जाए तो इस बीमारी से छुटकारा मिल सकता है।