दोनों थे अच्छे दोस्त, एक साथ पहुंचे दोनों के शव
अनूपशहर गंगापुल के पास हादसे में जान गंवाने वाले सुनील और नरेंद्र परिवार के भाई, उससे अच्छे दोनों दोस्त थे। इस कारण दोनों साथ ही काम करते थे। कोहरा दोनों के लिए काल बन गया। नरेंद्र और सुनील के पिता आपस में चचेरे तहेरे भाई हैं। परिवार में अच्छे संबंध होने की वजह से गजेंद्र और सुनील में भी बहुत प्यार था। ग्रामीणों के अनुसार अक्सर दोनों एक दूसरे के साथ ही रहते थे।
चार साल पहले दोनों लोग एक ही साथ गाजियाबाद में काम ढूंढने पहुंचे। जब से ही साहिबाबाद की एक कांच फैक्टरी में काम कर रहे थे। वहां से दोनों एक साथ छुट्टी लेकर घर आते थे। दो चार दिन रुकने के बाद फिर वापस लौट जाते थे। रविवार को भी दोनों एक बाइक पर सवार होकर गांव आ रहे थे।
हादसे में दोनों की मौत हो गई। अनूपशहर में सड़क हादसे में मारे गए एक ही परिवार के सुनील और नरेंद्र की मौत की सूचना जैसे ही उनके गांव गंगावास पहुंची तो परिवार में चीख पुकार मच गई। परिवार व गांव के कुछ लोग अनूपशहर के लिए रवाना हो गए। बुलंदशहर में पीएम होने के बाद देर रात दोनों के शव गांव पहुंचे।
यहां पहले से ही उनके अंतिम संस्कार की तैयारी थे। शव पहुंचते ही परिवार की महिलाएं बिलख पड़ी। चीख पुकार सुनकर वहां मौजूद हर किसी की आंख नम हो गई। देररात दोनों का गंगावास घाट नंबर दो पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
एक साल पहले हुई सुनील की शादी
सुनील की शादी करीब एक साल पहले हुई थी। सुनील की मौत से उसकी पत्नी नीतू का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार बार वह बेसुध हो रही थी। वहां मौजूद महिलाएं उसे दिलासा दे रही थी, लेकिन खुद के आंसू नहीं रोक पा रही थीं।
चार भाइयों में सबसे छोटा था सुनील
सुनील चार भाइयों में सबसे छोटा था। सुनील के पिता हेतराम किसान है। परिवार की स्थिति सामान्य है। इस लिए सुनील चार वर्ष से गाजियाबाद में रहकर अपने परिवार की आर्थिक सहयोग कर रहा था। उसकी मौत के बाद से पिता की आंख नम हैं। वह कुछ बोल नहीं पा रहे थे। बस चुपचाप मृत पड़े बेटे के शव को देख रहे थे।
तीन बहनों का अकेला भाई था नरेंद्र
नरेंद्र तीन बहनों का अकेला भाई था। उसकी मौत से परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी पुष्पा दहाड़े मार कर रो रही थी। परिवार में मां बाप हर कोई बेसुध दिखाई पड़ रहे थे। नरेंद्र का एक बेटा है जो दो साल का है। परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं है। जिस कारण नरेंद्र के पिता गांव में ही परिवार के साथ खेती करते हैं। नरेंद्र गाजियाबाद में काम कर परिवार की जीविका चलाता था।
गांव में दिन भर छाया रहा मातम
एक ही परिवार के दो युवकों की मौत के बाद गांव में मातम छा गया। यहां लोग सुबह मकर संक्रांति को लेकर स्नान करने जा रहे थे। वह सब हादसे के बाद मृतक परिवार के घर की ओर दौड़ पडे। पूरे दिन गांव में रोने चीखने की आवाज सुनाई देती रही। देर शाम तक फोन कर लोग मृतकों के पीएम होने की जानकारी लेते रहे। देर रात जब दोनों के शव गांव पहुंचे तो देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई।