संभल। रोहित ने शवों के अंतिम संस्कार से पहले लोगों से चीखते हुए गुहार लगाई कि वह अपने बच्चों को देखना चाहता है। जब किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो रोहित ने रोते हुए कहा कि मेरे बच्चों को देखने दो। लोग कुछ कहे बिना ही पकड़े खड़े रहे। हालांकि यह स्थिति भी काफी दर्दनाक थी। रोहित की हालत और बदहवासी को देखते हुए रोहित की पत्नी व बच्चों की चिता का अग्नि रोहित के सबसे छोटे भाई नीरज ने दी। गीता की चिता को अग्नि उनके पति सुनील ने दी। संवाद
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रिया को जिन हाथों से नीरज ने खिलाया था हलवा, उन्हीं हाथों से देनी पड़ी अग्नि
संभल। बृहस्पतिवार को जब रिया अपने माता-पिता के साथ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आई थी तो उसने अपने सबसे छोटे चाचा नीरज से बाजार लेकर जाने की जिद की थी। नीरज ने बताया कि बाजार जाकर उसने हलवा खाने के लिए कहा था। नीरज ने फफकते हुए कहा कि जिन हाथों से रिया को हलवा खिलाया था, उन्हीं हाथों से उसकी चिता को अग्नि देनी पड़ी। वह यह कहते हुए फफक-फफक कर रोने लगे। संवाद
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तहेरी-चचेरी बहन होने के साथ बन गई थीं देवरानी-जेठानी
संभल। रोहित अपने सात भाइयों में चौथे नंबर के हैं। उनकी शादी करीब 14 वर्ष पहले चंदौसी के संभल गेट निवासी रेनू के साथ से हुई थी। रेनू ने ही अपने देवर सुनील के लिए अपनी चचेरी बहन गीता को पसंद कर लिया था। सुनील की शादी गीता से 2019 में हुई थी। रेनू और गीता तहेरी-चचेरी बहन होने के साथ देवरानी और जेठानी भी बन गई थीं। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों बहन और देवरानी जेठानी थीं लेकिन आपस में बनती बहुत थी। इसलिए ही दोनों बहन परिवार के साथ आदमपुर में रहती थीं। अक्सर साथ ही आती जाती थीं। ग्रामीणों ने अफसोस जताते हुए कहा कि अब अंतिम संस्कार भी दोनों बहनों का एक साथ ही हुआ है। संवाद
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सुनील ने रोते हुए कहा- अब गीता के बिना कैसे रहूंगा
संभल। सुनील और गीता का विवाह तो 2019 में हुआ था लेकिन बच्चा नहीं था। पति-पत्नी एक दूसरे का काफी ख्याल रखते थे। शुक्रवार को जब गीता का शव गांव पहुंचा तो सुनील रोने लगे। रोते हुए कहा कि वह तो एक दिन भी गीता के बिना नहीं रह सकते थे। अब जिंदगी गीता के बिना कैसे गुजारी जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि पति-पत्नी में काफी प्रेम था। संवाद
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शवों के पीछे रोते हुए दौड़ने लगीं महिलाएं
संभल। एक ही परिवार में छह लोगों की मौत और चार शव एक साथ उठे तो रिश्तेदार और परिचित गमजदा दिखाई दिए। शव अंतिम संस्कार के लिए लेकर लोग चले तो महिलाएं चीखती रोती हुईं शवों के पीछे दौड़ने लगीं। किसी तरह लोगों ने महिलाओं को रोका और संभाला। कई महिलाएं तो बेसुध हो गईं। जिन्हीं गांव की महिलाओं ने संभाला। यह दर्दनाक मंजर देखकर हर आंख नम नजर आई। वहीं, दूसरी ओर शव देखने के लिए लोग छतों पर खड़े हो गए। पुलिस ने एहतियाती तौर पर लोगों को छतों से हटाया। कहीं कोई छज्जा गिर गया तो बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों से पुलिस ने अपील करते हुए कहा कि हादसों से बचने के लिए छतों से नीचे उतर आएं। संवाद
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सपा और भाजपा के नेता पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे
संभल। शव गांव पहुंचे तो आम लोगों के साथ राजनीतिक लोगों का पहुंचना भी शुरू हो गया। भाजपा से परमेश्वर लाल सैनी, मंजू दिलेर, ओमवीर खड़गवंशी, रामपाल सिंह, सपा से असमोली विधायक पिंकी यादव, जिलाध्यक्ष असगर अंसारी, कृष्ण मुरारी शंखधार समेत कई नेता पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंचे। वहीं, दूसरी ओर सराफा कारोबार से जुड़े कारोबारी भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। संवाद
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