प्रतिमा का शृंगार सौंदर्य प्रसाधनों से किया गया है। विशालकाय गणेश प्रतिमा पर 250 बेटियां (गुड़ियां)थीं, जोकि बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ का संदेश दे रही थी।
चंदौसी में निकाली जाने वाली श्रीगणेश रथयात्रा हर वर्ष अपनी थीम के लिए भी चर्चित रही है। उत्तर भारत की सबसे बड़ी गणेश रथयात्रा इस बार संयोग से शिक्षक दिवस पर निकाली गई। वैसे तो हर बार की रथयात्रा की थीम समाज को नया संदेश देती रही है।
लेकिन, इस बार शिक्षक दिवस होने के कारण रथयात्रा की थीम भी कुछ अलग ही संदेश देती नजर आई। इस बार यह रथयात्रा बेटियों की सरंक्षा का देती दिखी। मुख्य झांकी भगवान गणेश को 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' को समर्पित की गई। 20 फिट ऊंची और 12 फिट चौड़ी इस विशालकाय गणेश प्रतिमा को ढाई महीने में अजय आर्य, मोहन लाल, सुशील, आशुतोष, राजीव कृष्णा, टिप्पू आदि ने श्रमदान करके तैयार किया है।
इसमें श्रीगणेश के शृंगार में ढाई लाख बिंदियों, 250 गुड़ियों समेत महिलाओं के सौंदर्य प्रशाधन का उपयोग किया गया है। मुख्यत: हाथों पर अधिकांश गुड़िया हाथ जोड़ते हुए हैं, जो गणेश स्तुति के साथ-साथ समाज से भी बेटियों को बचाने व पढ़ाने की प्रार्थना कर रही हैं। कई के हाथों में स्लोगन लिखी पट्टिकाएं हैं, जिन पर ‘गणपति जी का यह वरदान-बेटी बेटा एक समान,‘आओ घर-घर अलख जगाएं-कन्या संतान को गले लगाएं।','यह सृष्टि हमें चलानी है तो कन्या संतान बचानी है।' आदि स्लोगन शामिल हैं।
अहम बात यह भी है कि पहली बार श्रीगणेश रथ यात्रा में श्रीगणेश की मुख्य मूर्ति को पंचमुखी बनाया गया है। पांच मुंह वाले भगवान श्रीगणेश की यह स्वचलित झांकी पूरी रथयात्रा में आकर्षण का केंद्र बनी रही। साथ ही लाउड स्पीकर से भी बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं का लगातार संदेश प्रसारित किया जा रहा था।
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