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रहमत का अशरा शुरू, रोजेदारों ने सारा दिन बारगाह-ए-इलाही में गुजारा

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संभल। रमजान का पूरा महीना मोमिनों के लिए खुदा की तरफ से अजमत, रहमत और बरकतों वाला महीना है। अल्लाह ने इस मुबारक महीने को तीन अशरों में तक्सीम किया है। पहला अशरा खुदा की रहमत वाला है। यह पहले रमजान से लेकर 10 रमजान तक चलता है। इस अशरे में खुदा की रहमत नाजिल होती है। रमजान का चांद नजर आते ही शैतान कैद कर लिया जाता है। जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं।
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अल्लाह अपनी रहमत से गुनाहगारों को अजाब से निजात देते हैं। नेक काम के सवाब में 70 गुना इजाफा कर दिया जाता है। शाही जामा मस्जिद के इमाम मौलाना आफताब हुसैन वारसी ने बताया कि हमारे नबी ने फरमाया है कि अगर लोगों को मालूम हो जाए कि रमजान क्या चीज है तो मेरी उम्मत साल के 12 महीने रमजान होने की तमन्ना करेगी। रमजान का महीना रहमत व बरकत वाला है।
इस मुबारक महीने में रोजा मर्द, बच्चे, औरत और बूढे़े पूरे उत्साह से रखते हैं। सहरी के बाद रोजेदार इबादत-ए-इलाही में गुजारते हैं। नमाज और कुरान की तिलावत हर घर में की जाती है। शहर इमाम ने कहा कि इस रमजान के महीने में लॉकडाउन चल रहा है। इसलिए रोजेदारों का फर्ज बनता है कि वह लॉकडाउन का पालन करें और घरों में रहकर ही इबादत करें। कहा कि इस मुबारक महीने में कमजोर लोगों का भी ख्याल रखा जाए। कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे।
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