संभल के मेंथा बाजार में हड़ताल का नजारा।
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मिलावट के अंदेशे में हो रही चेकिंग से नाराज स्थानीय दुकानदारों ने मेंथा तेल की खरीद फरोख्त बंद कर दी है। इसके दो दिन में कारोबार को दो करोड़ का झटका लगा है। यही हाल रहा तो मेंथॉल उत्पादों के स्थानीय निर्यातकों को पूरी तरह से दूसरे शहरों की मंडियों पर निर्भर होना पड़ेगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि मेंथा की खरीद फरोख्त करने वाले दुकानदारों और निर्यातकों में लगातार किसी न किसी तरीके से संवाद चल रहा है। दोनों पक्ष चाहते हैं कि ताजा गतिरोध का हल निकाया जाए। इस संबंध में अनौपचारिक स्तर पर बैठकें भी हो रही हैं।
संभल मंडी में एक दिन में एक करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। मंडी के स्थानीय दुकानदार जीएलसी के मानकों और मिलावट के अंदेशे में होने वाली चेकिंग से परेशान हो रहे हैं। उन्होंने इसे मुद्दा बनाया हुआ है जबकि निर्यातकों और मेंथॉल उत्पादों के निर्माताओं का कहना है कि मिलावट का मेंथा तेल बड़ी मात्रा में बाजारों में आ रहा है। प्राकृतिक मेंथा तेल में सिंथेटिक मेंथा तेल की मिलावट और कुछ दूसरे पदार्थ मिलाए जा रहे हैं।
कुछ मामले एक महीने के भीतर पकड़े गए और इसके चलते बड़े सौदे रद्द हुए और नुकसान उठाना पड़ा। इसलिए मेंथा तेल की खरीद करते वक्त अब वे सारे टेस्ट कराए जा रहे हैं जिनसे मिलावट को पकड़ा जा सकता है। टेस्टिंग की इस प्रक्रिया से ही आक्रोश पैदा हुआ है। सामान्य तौर पर दुकानदार नहीं चाहते हैं कि चेकिंग का ज्यादा झमेला हो। वह चाहते हैं कि जैसे पहले भरोसे पर कारोबार चल रहा था। मामूली चेकिंग से मामली स्पॉट चेकिंग ले लिया जाता था वैसे ही अब हो। लेकिन निर्यातक और मेंथाल उत्पादों के निर्माता इस पर राजी नहीं है। ऐसे में दुकानदारों ने माल बड़े निर्यातकों और मेंथा उत्पादकों को न देने का फैसला लिया है। इससे कारोबार को झटका लग रहा है।