संभल के चौधरी सराय में ट्रक में घुसा पुलिस के आंसू गैस का गोला।
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संभल। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में गुरुवार को सड़कों पर जन सैलाब उमड़ पड़ा था। पुलिस और प्रशासन के पास ऐसी कोई तैयारी नहीं थी जिससे कि धारा 144 का पालन कराया जा सके। कहा तो यहां तक जा रहा है कि संभल की सड़कों पर जो प्रदर्शन गुरुवार की दोपहर हुआ है उसमें कुछ भी अचानक नहीं हुआ है। इसके लिए तीन दिन से तैयारी चल रही थी। पुलिस इसे लेकर बेखबर क्यों बनी रही। क्यों नहीं भीड़ को देखते हुए इंतजाम किए गए। यह सवाल अहम है। सवाल यह भी है कि पुलिस ने विरोध को हल्के से क्यों लिया।
संभल के चौधरी सराय में 16 दिसंबर की दोपहर नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। इसी प्रदर्शन के दौरान 19 दिसंबर को नगर पालिका मैदान में बड़े विरोध प्रदर्शन का एलान किया गया। जिस वक्त एलान हुआ मंच पर एसडीएम और सीओ भी थे। इसके बाद लोग तैयारी में जुट गए। प्रशासन का संवाद किसके साथ रहा, यह साफ नहीं है लेकिन लोगों की तैयारी का नतीजा 19 दिसंबर की सुबह से ही दिखने लगा था।
दिन में 11 बजे सरायतरीन से लोग संभल के लिए चल पड़े थे जब लोग संभल आ रहे थे। रास्ते में पुलिस क्षेत्राधिकारी ने लोगों को रोकने का प्रयास किया लेकिन भीड़ अधिक थी और लोग नहीं रुके। संभल और सरायतरीन से भीड़ के जत्थे नगर पालिका मैदान की ओर बढ़ने लगे। पुलिस के पास इन्हें रोकने का कोई इंतजाम नहीं था। जहां-तहां पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को रोकने का प्रयास तो किया पर पुलिस बल कम होने की वजह से लोग रोकने पर भी नहीं माने।
नारेबाजी करते नगर पालिका की ओर बढ़ते रहे। दोपहर बारह बजे तक नगर पालिका मैदान में कई हजार लोग पहुंच गए थे। इसमें युवा सबसे ज्यादा थे। बहुत संख्या किशोरों की भी थी। जब भीड़ नगर पालिका मैदान में पहुंचने की खबर फैली तो वरिष्ठ अधिकारी संभल पहुंचे।
अपर पुलिस अधीक्षक भारी पुलिस बल के साथ नगर पालिका मैदान में मुस्तैद हो गए। उनके सामने ही लोगों ने नारेबाजी की और आक्रोश व्यक्त किया। इस बीच यह भी पता लगा कि अगर पुलिस प्रशासन पहले से लोगों की तैयारी का संज्ञान लेता तो हो सकता है कि इतनी ज्यादा भीड़ सड़कों पर न दिखती। भीड़ पर कंट्रोल रहता तो बवाल भी नहीं होता।