संभल। संभल से सात किलोमीटर दूरी पर स्थित गांव फिरोजपुर के पुराने किले का निरीक्षण करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम के साथ डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई पहुंचे। अधिकारियों ने किले की स्थिति का जायजा लिया। मुगल बादशाह शाहजहां के दौर में 1650 या 1655 में इस किले का निर्माण कराया गया था। वर्षों से इस किले का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से किया जा रहा है। वर्तमान में इस किले की स्थिति बेहद जर्जर है। इस किले पर संरक्षित स्मारक का बोर्ड तो लगा है, लेकिन किला लगातार जर्जर हो रहा है।
डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि बुधवार को फिरोजपुर स्थित पुराने किले, तोता मैना की कब्र, प्राचीन बावड़ी (चोर कुआं) का एएसआई की टीम के साथ निरीक्षण किया है। फिरोजपुर किला तो पहले से ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है। मौका मुआयना कर स्थिति की जानकारी ली है और सुधार कराने के लिए आग्रह किया है। जिससे ऐतिहासिक धरोहर को संजोए रखा जा सके। प्राचीन बावड़ी और तोता मैना की कब्र को संवारने का काम किया जाएगा। नीमसार तीर्थ के कूप को खोल दिया गया है। उसका भी सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। वह कूप भी प्राचीन है।
शाहजहां के सेनापति सैयद फिरोज शाह द्वारा बनवाया गया था किला
सैयद फिरोज शाह फिरोजपुर गांव में आकर बसे थे। वह मुगल शासक शाहजहां के सेनापति थे। बताया जाता है कि आगरा में दुश्मनों की घेराबंदी किए जाने के बाद सैयद फिरोज शाह ने फिरोजपुर में अपने ठहरने के लिए किले का निर्माण कराया था। इसलिए सैयद फिरोज शाह के ही नाम से इस गांव का नाम फिरोजपुर रखा गया था। किले के भीतर भूमि पर एक बुर्ज और कुआं बना है। निकट ही मस्जिद है। किले और मस्जिद दोनों पुरातत्व विभाग से संरक्षित हैं।
वर्ष 2017-18 में एएसआई ने 1.40 करोड़ रुपये मरम्मत पर खर्च किए थे
पुराने किले से मशहूर इस किले पर वर्ष 2017-18 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से 1.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। बाउंड्री का निर्माण कराया था लेकिन इस बाउंड्री से कोई लाभ नहीं दिखता है। लोगों की आवाजाही बदस्तूर जारी है। लगातार किला खंडहर होता जा रहा है। सफाई का भी अभाव रहता है। जो धरोहर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होनी चाहिए थी, वह देखरेख के अभाव में है।
प्राचीन बावड़ी (चोर कुआं) को नहीं मिल सका संरक्षण
संभल के नजदीक प्राचीन बावड़ी है। जो चोर कुआं के नाम से प्रसिद्ध है। इस बावड़ी में कक्ष रूपी स्थान हैं। नीचे उतरने के लिए सीढ़ी बनी हैं लेकिन संरक्षित नहीं होने के चलते लोगों की आवाजाही से यह धरोहर भी नष्ट होने की कगार पर है। कूड़ा व मिट्टी से लगातार पटान किया जा रहा है। जबकि यह भी संभल के रोचक दर्शनीय स्थलों में शामिल है।
तोता मैना की कब्र एक रहस्य
संभल शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर संभल-गवां मार्ग पर एक कब्र है। लोक मान्यता में ये कब्र तोता-मैना की कब्र है और प्रेमी की निशानी के तौर पर पहचानी जाती है। इस कब्र को देखने के लिए दूर दराज से लोग आते हैं। इस कब्र पर आयतल कुर्सी और दूसरी तरफ नाद ए अली आयत लिखी है। इस कब्र पर 939 हिजरी लिखा हुआ है। माना जाता है कि इस हिजरी में ही इसको बनाया गया लेकिन क्यों बनाया गया इसका उत्तर नहीं मिलता है। जानकार अपने अपने तरीके से इस कब्र को लेकर व्याख्या करते हैं।
संभल में ऐतिहासिक धरोहर हैं। उनके संरक्षण और संवारने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में फिरोजपुर किला, राजपूत काल की प्राचीन बावड़ी और तोता मैना की कब्र का एएसआई की टीम के साथ निरीक्षण किया है। धरोहरों को संवारा जाएगा। जिससे संभल पर्यटन स्थल के रूप में पहचाना जाए।- डॉ. राजेंद्र पैंसिया, डीएम, संभल
भमोरा। फाईल फोटो अंजली- फोटो : mathura