संभल। पवांसा क्षेत्र में दिलगौरा-साकिन शोभापुर खालसा मार्ग पर शनिवार की सुबह में मादा हिरन पर कुत्तों ने हमला कर दिया। हमले में घायल हुई मादा हिरन की कुछ देर बाद मौत हो गई। वन विभाग को सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने पोस्टमार्टम किया। इसके बाद शव को दबा दिया गया।
पवांसा क्षेत्र में शनिवार की सुबह सात बजे के करीब दिलगौरा-साकिन शोभापुर खालसा मार्ग पर एक मादा हिरन को मक्का के खेत में खूंखार कुत्तों ने घेरते हुए हमला कर दिया। आसपास से गुजर रहे लोगों ने बमुश्किल खूंखार कुत्तों के चंगुल से मादा हिरन को बचाया। बताया गया कि एक-दो दिन में मादा हिरन बच्चे को जन्म देने वाली थी। इससे पहले ही खूंखार कुत्तों के हमले में उसकी मौत हो गई। जंगल में खूंखार कुत्तों के हमले से हिरनों की हुई मौत की वजह से अब हिरन दिखाई नहीं देते हैं। वन विभाग के अधिकारी इससे बेफ्रिक हैं। यही वजह है कि हिरन के संरक्षण को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया है।
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कोट
मादा हिरन के खूंखार कुत्तों के हमले में गंभीर रूप से घायल होने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। शव का पोस्टमार्टम कर शव ग्रामीणों को सौंप दिया है। हमले में मादा हिरन का अधिक खून बह जाने से उसकी मौत हो गई। मादा हिरन गर्भवती थी। एक-दो दिन में ही बच्चों को जन्म दे देती।
डा. नीरज गौतम, उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी पवांसा।
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कोट
खूंखार कुत्तों के हमले में मादा हिरन की मौत की सूचना मिली है। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी से पोस्टमार्टम कराने के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। मादा हिरन गर्भवती थी। क्षेत्र में हिरन के बचाव के लिए कर्मचारियों को लगा रखा है और लगातार किसानों से हिरनों की संरक्षण की अपील कर रहे हैं। ज्यादातर किसान फसल में अब रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं। जिसके पानी पीने से हिरन सुस्त हो जाते हैं। इसी का मौका पाकर खूंखार कुत्ते हमला कर देते हैं। शासन से संरक्षित क्षेत्र घोषित करने के लिए पत्र भेजा है।
अरविंद कुमार, डीएफओ संभल।
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इनसेट
बीते साढ़े चार साल में कुत्तों के हमले में 28 हिरनों की मौत
वर्ष- मौतें
2018- 5
2019- 9
2020- 5
2021- 8
2022- 1
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