बहजोई ब्लॉक के गांव बल्लमपुर में बाजरे का मलबा कुछ इस तरह जलाया गया।
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संभल। दिवाली के बाद से जिले में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। पराली, कूड़ा और बाजरे का मलबा जलाने वाले बाज नहीं आ रहे हैं। जिम्मेदार इस प्रदूषण को रोकने में नाकामयाब साबित हो रहे हैं। नगरीय निकाय क्षेत्रों में कूड़े के ढेर आग के हवाले किए जा रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में पराली से वातावरण दूषित किया जा रहा है। प्रदूषण के कारण सुबह सैर करने वाले लोग भी कम ही निकल रहे हैं। क्योंकि सुबह-सुबह धुंध का प्रकोप काफी नजर आता है।
प्रदूषण इतना अधिक हो गया कि लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत आने लगी और आंखों में जलन महसूस हो रही है। लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे जाहिर है कि प्रशासन को लोगों के स्वास्थ्य की चिंता नहीं है। पिछले कुछ दिनों से जिला प्रदूषित होता जा रहा है। इसका कारण ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों द्वारा पराली जलाना और शहरी क्षेत्रों में कूड़े के ढेर और टायर जलाना है।
इसके अलावा जिले में यातायात व्यवस्था का खराब रहना भी प्रदूषण बढ़ने का एक मुख्य कारण है। प्रशासन का दावा है कि वह बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
किसानों और लोगों को पराली, कूड़ा नहीं जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। लेकिन प्रशासन का यह प्रयास नजर नहीं आ रहा है। शुक्रवार को बहजोई ब्लॉक के गांव बल्लमपुर में बाजरे का मलबा बहुत तादात में जलता मिला। जिससे उठता धूआं आसमान को छिपा रहा था। वहीं इसी ब्लॉक के गांव किरारी और दिलबोरा में पराली जलती मिली है। इससे साफ जाहिर है कि प्रशासन गंभीर नहीं है। इसलिए ही लगातार प्रदूषण फैलाया जा रहा है।
पुराने टायर को तैयार करने के लिए फैला रहे प्रदूषण
नगर के कई स्थानों पर पुराने टायर को नया बनाने का काम किया जाता है। इसके लिए पहले आग में तपाया जाता है। जिसके बाद उसे फिर से तैयार किया जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान जो प्रदूषण होता है वह बेहद खतरनाक होता है। इस प्रक्रिया के लिए टायर को पकाने के लिए टायर के ही मलबे को आग में डालकर आग तैयार की जाती है। इस दौरान जो धूआं निकलता है वह बेहद खतरनाक और विषैली गैसों से भरा होता है। यदि किसी को एक बार आंख में धूआं लग जाए तो आंख को लाल कर देता है। उस स्थान पर नाक और मुंह को बंद कर निकलना मुश्किल होता है। लेकिन इस प्रदूषण की ओर प्रशासन का कभी ध्यान नहीं गया। जबकि यह कार्य काफी समय से किया जा रहा है।
क्या बोले चिकित्सक
नगरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी जुहेब करीम का कहना है कि प्रदूषण बढ़ने से सबसे ज्यादा परेशानी सांस के मरीजों को होती है। सांस के मरीजों का घरों के अंदर भी बैठना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सांस के खासकर अस्थमा के मरीजों को घरों से बाहर निकलने में परहेज करना चाहिए। मुंह पर मास्क पहनना चाहिए और सामान्य लोगों को भी सुबह और शाम की सैर फिलहाल बंद कर देनी चाहिए। यह प्रदूषण का बढ़ता स्तर सामान्य लोगों में भी सांस जैसी बीमारियां बढ़ा सकता है। इसलिए सावधानी बरतनी चाहिए।