संभल। जिलेभर में बुखार का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। पिछले चार दिनों में चार लोगों की जान जा चुकी है। इस गंभीर स्थिति के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम ठंडे हैं। स्वाइन फ्लू का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके बाद भी जांच के लिए किट तक उपलब्ध नहीं है।
शुक्रवार को आधा दिन ही ओपीडी हुई है। जिला अस्पताल में 67 मरीज बुखार के भर्ती हैं, जो दो से दिन के अंदर भर्ती किए गए हैं। 100 से ज्यादा मरीज उपचार के लिए ओपीडी में पहुंचे। इसी तरह जिले की सभी दस सीएचसी पर हर दिन छह से सात हजार मरीजों की ओपीडी होती है। इसमें 30 से 40 प्रतिशत मरीज बुखार, खांसी और सर्दी के पहुंचते हैं।
मलेरिया, डेंगू के मरीज तो मिलने लगे हैं लेकिन इस समय सबसे बड़ा खतरा स्वाइन फ्लू का है तो उसकी जांच नहीं हो पा रही है। जांच के लिए आवश्यक किट नहीं मिल पाई है। बुखार के बढ़ते मामलों को देखते हुए कोई अतिरिक्त सतर्कता भी नहीं बरती जा रही है।
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स्वाइन फ्लू के लिए नमूना तक नहीं लिया गया
किट की उपलब्धता नहीं होने के चलते मेरठ स्थित लैब में स्वाइन फ्लू आशंकित मरीज की जांच कराई जा सकती है। शासन की ओर से जांच के लिए लैब मेरठ की तय की है। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि अभी तक कोई नमूना जिले में लिया ही नहीं गया है। न किट है और न लैब पर जांच हुई है। जबकि बुखार के चलते तीन बच्चों समेत चार की मौत हो चुकी है।
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कोट
जांच किट के लिए मांग पत्र भेजा गया है। 10 सितंबर तक किट उपलब्ध होने का अनुमान है। फिलहाल जहां बुखार की मौत का मामला सामने आता है तो जांच कराई जा रही है। असमोली क्षेत्र में एक बच्चा समेत दो की मौत का मामला सामने आया था। उसमें सामने आया है कि दूसरी बीमारी के चलते मौत हुई है। यह सही है कि बुखार भी आया था।
डॉ. मनोज चौधरी, जिला सर्विलांस अधिकारी