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पीसीएस परीक्षा : कड़ी मेहनत से गढ़ी सफलता की इबारत

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संभल। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, प्रयागराज द्वारा आयोजित पीसीएस परीक्षा 2024 में एमजीएम पीजी कॉलेज के शोध छात्र नीरज तिवारी, गांव मोहम्मदपुर भंडा की निवासी दीपशिखा, गुन्नौर के सतेंद्र कुमार और चयनित हुए हैं। इसके अलावा डीडीओ राम आशीष की बेटी स्वाति ने भी कामयाबी हासिल की। कड़ी मेहनत, लगन और लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण हो तो सफलता देर-सवेर कदम जरूर चूमती है। तीनों ही इसके जीवंत उदाहरण बने हैं।
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नीरज तिवारी 32वीं रैंक लाकर खंड विकास अधिकारी, दीपशिखा सिंह 13वीं पाकर अधिशासी अधिकारी और सतेंद्र कुमार 160वीं रैंक हासिल करके नायब तहसीलदार बने हैं। वहीं, स्वाति का चयन खंड विकास अधिकारी के पद पर हुआ है। होनहारों की इस कामयाबी से परिवार में खुशी का माहौल है।
मूल रूप से अयोध्या जनपद के निवासी नवनीत तिवारी एमजीएम पीजी कॉलेज, संभल के भूगोल विभाग के शोध छात्र हैं। वह प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. योगेंद्र सिंह के निर्देशन में उत्तर प्रदेश के अयोध्या जनपद में परिवर्तनीय कृषि भू-उपयोग प्रतिरूप विषय पर पीएचडी कर रहे हैं। प्राचार्य डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि एमजीएम पीजी कॉलेज के इतिहास में नवनीत तिवारी पहले ऐसे छात्र हैं, जिन्होंने यह परीक्षा उत्तीर्ण की है। उनकी इस उपलब्धि से महाविद्यालय गौरवान्वित हुआ है।
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दूसरी ओर, संभल के गांव मोहम्मदपुर भंडा की निवासी दीपशिखा ने अपने पहले ही प्रयास में सफलता पाकर सिद्ध कर दिया है कि लगातार मेहनत करने से सफलता निश्चित ही कदम चूमती है। दीपशिखा गांव की पहली ऐसी बेटी है, जिसने जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करके इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। बाद में हिंदू कॉलेज, मुरादाबाद से स्नातक और फिर बाद में केजीके कॉलेज से परास्नातक की पढ़ाई पूरी की। गुन्नौर तहसील क्षेत्र के गांव मेड़ा मनी के निवासी सत्येंद्र कुमार ने भी कड़ी सफलता के बाद कामयाबी पाई है।
वहीं, मऊ जिले के गांव विशुनपुरा के निवासी जिला विकास अधिकारी राम आशीष की बेटी स्वाति को भी पीसीएस परीक्षा में सफलता मिली है।
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पांचवें प्रयास में चढ़े सफलता की सीढ़ी
नवनीत तिवारी ने बताया कि उन्होंने डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद से भूगोल विषय में परास्नातक किया और फिर यूजीसी नेट जेआरएफ उत्तीर्ण की। चार बार पीसीएस की मुख्य परीक्षा दी लेकिन कामयाबी नहीं मिली। पांचवें प्रयास में साक्षात्कार तक पहुंचे, जिसके बाद यह कामयाबी मिली है। पांचवें प्रयास में मिली इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि असफलताएं सिर्फ सफलता की सीढ़ी होती हैं। बताया कि इससे पहले वह दो बार सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी थी।
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पहला प्रयास और सेल्फ स्टडी से पाई सफलता
किसान परिवार में जन्मी दीपशिखा बताती हैं कि शुरुआत में अच्छे स्कूल में पढ़ाई करने में आर्थिक स्थिति आड़े आई। लेकिन इरादा मजबूत था, उन्होंने नवोदय विद्यालय की परीक्षा दी। इसमें सफलता मिली और इंटरमीडिएट तक पढ़ाई पूरी की। एमएमएच कॉलेज गाजियाबाद से पीएचडी और फिर मुरादाबाद में अपने चाचा के आवास पर रहकर सेल्फ स्टडी की। इस कामयाबी का श्रेय वह अपने माता-पिता और परिवार के साथ-साथ चाचा व गुरुजनों को देती हैं।
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स्मार्ट प्लानिंग और नियमित पढ़ाई से मिली सफलता
सत्येंद्र कुमार यादव ने बताया कि निरंतर कई वर्षों के अथक प्रयास के बाद सफलता मिली। इसके अलावा अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं को भी उन्होंने साहस के साथ पार किया। स्मार्ट प्लानिंग और नियमित पढ़ाई से यह सफलता मिली है। यह सफलता परिवार के लोगों और गुरुजनों के सहयोग को समर्पित है।
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डीडीओ की बेटी को भी मिली सफलता, बीडीओ बनीं

संभल। जिला विकास अधिकारी राम आशीष की बेटी स्वाति को भी पीसीएस परीक्षा में सफलता मिली है। उनका चयन खंड विकास अधिकारी के पद पर हुआ है। जनपद के अधिकारियों और अन्य लोगों ने बधाई दी। मालूम हो जिला विकास अधिकारी मऊ जिले के गांव विशुनपुरा के निवासी हैं। संवाद
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