बहजोई में पर्यूषण पर्व पर पूजा-अर्चना करते जैन समाज के लोग। स्रोत-जैन समाज
बहजोई(संभल)। श्री दिगंबर जैन मंदिर में पर्यूषण महापर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की आराधना श्रद्धा व भक्ति के साथ पूरी हुई। इस बीच मूलनायक भगवान श्री चंद्रप्रभु का भव्य महा मस्तकाभिषेक पूरा हुआ। इसके बाद चंद्रप्रभु महामंडल विधान का भव्य आयोजन हुआ। किया गया।बुधवार का चंद्र कुमार जैन शास्त्री ने विचार रखते हुए उत्तम तप के महत्व पर रोशनी डालते हुए कहा कि तप आत्मा का असली आभूषण है। यह मोह, राग और भोग की प्रवृत्तियों को शांत कर आत्मा को पवित्रता और निर्मलता की ओर ले जाता है। तप के माध्यम से आत्मा अपने असली स्वरूप का अनुभव करती है और मोक्ष मार्ग की ओर आगे बढ़ती है।
वहीं, शाम को सामूहिक आरती, प्रवचन व सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इसके बाद हुई नृत्य प्रतियोगिता में जूनियर वर्ग में कुशाग्र जैन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं, प्रत्यक्ष जैन व वेदांश जैन ने द्वितीय तथा मानविक ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा प्रिशा जैन को विशेष प्रस्तुति का पुरस्कार दिया गया। साथ ही वरिष्ठ वर्ग में विधान व विदुशी जैन को प्रथम स्थान दिया गया। संचालन महामंत्री संभव जैन ने किया।