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धान की खेती में 35 से 40 फीसदी बढ़ गई लागत, आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान

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संभल। डीजल, बिजली, खाद, बीज एवं कीटनाशकों के दामों में हुई वृद्धि ने धान उत्पादक किसानों की हालत खराब कर दी है। धान की खेती की लागत में 35 से 40 फीसदी तक इजाफा हुआ है। जहां मजदूरी महंगी हुई, वहीं ट्रैक्टर से जुताई में भी डेढ़ गुना की वृद्घि हुई है। इससे किसान परेशान हैं और वे सरकार से राहत दिलाए जाने की मांग कर रहे हैं।
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जुलाई माह में अब तक बेहद कम बारिश हुई है। इस कारण खेतों में लगी धान की पौध गर्मी से झुलस गई। छोटे किसान बेहद परेशान हैं। सिंचाई के लिए वह ट्यूबवेलों का सहारा जरूर ले रहे हैं, लेकिन बिजली की अघोषित कटौती खूब परेशान कर रही है। बताते चले कि अब तक धान की रोपाई 90 फीसदी तक हो चुकी है। किसानों का मानना है कि यदि फसल कम पैदा हुई और अच्छे दाम नहीं मिले तो लागत भी नहीं निकल पाएगी।
चार से पांच हजार रुपये है एक बीघा की लागत
किसानों के मुताबिक विभिन्न मदों में बढ़े दामों के चलते वर्तमान में एक बीघा धान की फसल में लागत चार से पांच हजार रुपये की आ रही है। जबकि पिछले वर्ष ढाई से तीन हजार रुपये औसत लागत थी। सबसे ज्यादा खर्च किसानों को सिंचाई पर करना पड़ रहा है। बिजली की अघोषित कटौती के चलते पंपसेट लगाकर सिंचाई करनी पड़ रही है, जिसमें डीजल की खपत हो रही है। वर्तमान में 90.52 रुपये प्रति लीटर डीजल के दाम हैं। एक घंटे में पंपसेट औसतन तीन से चार लीटर की खपत करता है। एक बीघा की सिंचाई के लिए डेढ़ से दो घंटे पंपसेट चलता है।
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पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल के दाम
- डीजल: पिछले साल जुलाई में करीब 60 रुपये प्रति लीटर, इस साल 90.52 रुपये प्रति लीटर है।
- पेस्टीसाइड और हर्बीसाइड: पिछले साल की तुलना में दस पंद्रह फीसदी की बढ़ोत्तरी।
- बिजली: पिछले साल 140 रुपये प्रति हॉर्स पावर, इस बार 170 रुपये प्रति हॉर्स पावर।
- मजदूरी: पिछले साल बुवाई 500 रुपये प्रति बीघा, इस साल 650 रुपये प्रति बीघा।
- ट्रैक्टर से जुताई: पिछले साल 140 रुपये बीघा, इस साल 200 रुपये प्रति बीघा।
- कीटनाशक दवाओं के स्प्रे की मजदूरी: पिछले साल 60 रुपये थी, इस बार 80 रुपये है।
धान की किस्म के हिसाब से एक बीघा में उत्पादन
- सुंगधा: एक बीघा में अनुमानित पांच क्विंटल
-1509- एक बीघा में अनुमानित तीन क्विंटल
- पी-10 -एक बीघा में अनुमानित चार क्विंटल
- वसंती- एक बीघा में अनुमानित चार क्विंटल
पिछले साल मिले फसलों के रेट
- सुंगधा: 2200 रुपये प्रति क्विंटल
-1509- 2600 रुपये प्रति क्विंटल
- पी-10 3000 रुपये प्रति क्विंटल
- वसंती- 2000 रुपये प्रति क्विंटल
क्या कहते हैं किसान
बिजली एवं डीजल की दरों में वृद्घि से धान की लागत में 35 से 40 फीसदी इजाफा हुआ है। खाद, बीज एवं पेस्टीसाइड के दामों में पिछले साल की तुलना में वृद्घि हुई है। बारिश भी कम होने से जलस्तर घटा है। किसानों को सिंचाई पंपसेट अधिक देर तक चलाना पड़ रहा है।
वीरेंद्र चौधरी, किसान/भाकियू अराजनैतिक के जिला महासचिव
फोटो
किसानों की हितैषी बनने वाली मौजूदा सरकार के राज में डीजल, बिजली, खाद, बीज और कीटनाशकों के दामों में वृद्घि के चलते धान उत्पादक किसानों की लागत डेढ़ से दो गुनी हो गई है। कम बारिश ने भी लागत में इजाफा किया है। किसान परेेशानियों मेें उलझकर रह गया है।
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राजपाल सिंह, भाकियू असली के जिलाध्यक्ष
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