संभल। बीमित व्यक्ति के उपचार में खर्च हुई कुल धनराशि का पूरा भुगतान न करने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने आदेश दिया है कि बीमा कंपनी बीमित व्यक्ति के उपचार में खर्च हुई कुल धनराशि में से देने से बचे 245500 रुपये परिवादी को नौ फीसदी वार्षिक ब्याज सहित देने के साथ ही वाद व्यय में खर्च 10000 दो माह के अंदर अदा करें।
दरअसल, चंदौसी के निवासी सजल कुमार पुत्र राकेश कुमार कोविड-19 बीमारी की चपेट में आ गए थे। सजल ने उपचार के लिए बीमा हेल्थ पॉलिसी स्टार हेल्थ कंपनी से ले रखी थी। इसी पॉलिसी के आधार पर वह नोएडा के निजी अस्पताल में भर्ती रहे। उनका इलाज हुआ। जिसके बदले 387500 रुपये वसूले गए।
उपचार में खर्च हुई इस धनराशि के क्लेम के लिए सजल कुमार ने स्टार हेल्थ बीमा पॉलिसी से संपर्क किया। जिस पर हेल्थ पॉलिसी द्वारा मात्र 142000 का ही भुगतान किया गया। बार-बार कंपनी से शेष धनराशि दिलाने का आग्रह करने के बावजूद भी सजल कुमार की कोई बात नहीं सुनी गई। जिस पर मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा। वादी के अधिवक्ता लव मोहन वार्ष्णेय ने बताया कि बीमा पॉलिसी कैशलेस थी। बीमा कंपनी द्वारा सिर्फ 142000 का ही भुगतान किया गया था। जबकि 245500 अदा नहीं किए गए थे।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने अपना निर्णय सुनाते हुए बीमा कंपनी को आदेश की दिया की स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड परिवादी को रुपये 245500 परिवादी को परिवाद प्रस्तुत करने की दिनांक से वास्तविक अदायगी तिथि तक 9% वार्षिक ब्याज सहित तथा वाद व्यय में 10000 दो माह के अंदर अदा करें।