संभल। करोड़ों रुपये खर्च करके आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का दावा करने वाले जिला अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन के लिए अब तक व्यवस्थाएं मुकम्मल नहीं हो सकी। ऑपरेशन थियेटर बनाया लेकिन वह भी मुकम्मल नहीं। यही वजह है नेत्र चिकित्सक के होने के बाद भी यहां मोतियाबिंद के मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। मरीज निजी अस्पताल या फिर अन्य सरकारी अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन कराने को मजबूर हैं।
जिला अस्पताल 100 बेड का है। इसमें सीटी स्कैन से लेकर अल्ट्रासाउंड तक होता है। ब्लड बैंक का संचालन भी है। इस अस्पताल में मोतियाबिंद के लिए ऑपरेशन के लिए ऑपरेशन थियेटर बनाई गई लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। ओटी के नाम पर एक छोटे से कक्ष में रखे माइक्रोस्कोप जैसे महत्वपूर्ण उपकरण बेहतर गुणवत्ता के नहीं है। ऐसे में यदि मरीज का ऑपरेशन किया गया तो रोशनी मिलने की उम्मीद तो टूटी ही जाएगी।
नेत्र चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार सिंह का कहना है कि उपकरण की कमी है और ओटी ऑपरेशन करने की स्थिति में नहीं है। बताया कि उनकी तैनाती नवंबर 2023 में हुई थी। उसके बाद से लगातार ओटी और उपकरण की मांग की है। मरीजों की बात की जाए तो हर दिन दो से तीन मरीज मोतियाबिंद पीड़ित बुजुर्ग पहुंच जाते हैं। फिलहाल तो दवाई से ही काम चला रहे हैं।
को मशीन के लिए पत्राचार चल रहा है। मशीन मिलने के बाद मरीजों को बेहतर और आधुनिक उपचार मिल सकेगा। फेको मशीन अल्ट्रासोनिक तरंगों से आंख के खराब लेंस को छोटे टुकड़ों में तोड़कर निकालती है। इसके बाद कृत्रिम लेंस लगाया जाता है। इस प्रक्रिया में चीरा नहीं लगाना पड़ता और मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है।
डाॅ. राजेश कुमार सिंह, नेत्र रोग विशेषज्ञ