संभल। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने संभल में वर्षों से चल रहे कचरा डंपिंग और बढ़ते प्रदूषण के मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है। संभल शहर में स्थित एक कब्रिस्तान और तुर्तीपुर इल्हा के आसपास कचरा डंप किया जा रहा है। इस संबंध में एनजीटी ने डीएम, ईओ नगर पालिका, प्रदूषण विभाग समेत अन्य अधिकारियों को तलब किया है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने नगर पालिका द्वारा लंबे समय से कचरा आवासीय कॉलोनियों, स्कूलों और कृषि भूमि के पास खुलेआम फेंके से वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट की स्थिति उत्पन्न होने के मामले का संज्ञान लिया है। अप्रैल 2025 में कूड़ा डंपिंग साइट पर आग लगने की घटना भी हुई है। प्राधिकरण ने गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघन मानते हुए प्रदेश सरकार, शहरी विकास विभाग, नगर पालिका और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया है। साथ ही, एक संयुक्त जांच समिति का गठन भी किया गया है। इसमें डीएम संभल और यूपीपीसीबी के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
समिति दो सप्ताह में मौके का निरीक्षण कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने के बाद एक महीने में एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इस मामले की सुनवाई 12 जनवरी 2026 को होनी है। दूसरी तरफ, कूड़ा डालने की वजह से ग्रामीण भी परेशान हैं। उनका कहना है कि कूड़े के कारण लोग बीमार भी हुए हैं। कूड़े में आग लगने के कारण धुएं से भी दिक्कत होती है।
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कूड़ा डालने और उसमें आग लगने पर प्रदूषण फैलता है, जो कूड़ा रास्ते में गिरता है, उसे कोई उठाने वाला कोई नहीं होता। हवा चलने पर बदबू आती है। संक्रमण के साथ बीमारी फैलती है। इस कारण गांव के अधिकतर लोग बीमार रहे हैं।
-रमेश, गांव रसूलपुर सराय
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प्रदूषण का आलम यह है कि हर घर में बीमारी बढ़ रही है। जितना भी कमा पा रहे हैं, उपचार में लगाना पड़ रहा है। सांस, एलर्जी और खांसी की समस्या अधिक है। शिकायत के बाद भी कचरा वहीं पड़ रहा है
-धर्मेंद्र, गांव रसूलपुर सराय
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पहले कूड़ा और फिर आग लगाकर प्रदूषण को बढ़ाया जा रहा है। रही सही कसर रास्ते में गिर जाने वाला कूड़ा पूरी करता है, उसे बीनना पड़ता है। धुएं के कारण खेती पर भी असर पड़ता है। फसल काली पड़ जाती है।
-मूलचंद, गांव रुकनुद्दीन सराय
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वर्ष 2007 में शहर और आबादी से दूर कूड़ा निस्तारण के लिए डंपिंग ग्राउंड बनाया गया था। वहां कूड़ा निस्तारण के लिए ट्रामा प्लांट भी लगाया जा रहा है। पूर्व में प्लांट एटूजेड कंपनी ने स्थापित किया था, जिसकी इकाई सीएनडीएस ने कार्य कर रही थी, लेकिन प्रोजेक्ट वर्ष 2012 में अटक गया था। अब सीएनडीएस द्वारा प्रोजेक्ट को शासन को भेजा गया है, स्वीकृति मिलते ही प्लांट का कार्य शुरू किया जाएगा। एनजीटी में सुनवाई से पहले डंपिंग ग्राउंड से कूड़ा कचरा हटा लिया जाएगा।
-डॉ.मणिभूषण तिवारी, ईओ नगर पालिका
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साइड खबर
एनजीटी में समय-समय पर होती रही है संभल प्रशासन की फजीहत
संभल जिले में पर्यावरण के दूषित होने की समस्या फिलहाल सामने आई है। इससे पहले वर्ष-2017 में एनजीटी में संभल जिले के चंदौसी निवासी अधिवक्ता गौरव बंसल याचिका दाखिल करके दूषित जल के मुद्दे पर प्रशासन को घेर चुके हैं। उन्होंने जिले के 32 से अधिक गांवों प्रदूषित पानी से बीमारियां फैलने का मुद्दा उठाया था। एनजीटी ने उस समय उनकी याचिका पर जल निगम, जिलाधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब मांगा था। लेकिन बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।