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पांच साल में सिर्फ भीमनगर से संभल तक का सफर, मुख्यालय पर असमंजस

Wed, 28 Sep 2016 01:04 AM IST
देव शर्मा/अमर उजाला, संभल
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लेकिन, शाम होते ही मुख्यालय तीनों तहसीलों के मध्य में बनाने का एलान कर दिया। जोकि अब तक तय नहीं हो सका है। हालांकि जिले का नाम सपा सरकार ने 25 जुलाई-2012 को भीमनगर से संभल कर दिया। एक सितंबर-2015 को पंवासा में जिला मुख्यालय का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया लेकिन बजट में एक रुपया भी आवंटित नहीं किया।
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संभल, चंदौसी और गुन्नौर तहसीलों को मिलाकर बने नए जिले में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के चंदौसी में बैठने की बात आई तो विरोध प्रदर्शन होने लगे। फिर तो संभल के साथ साथ चंदौसी में भी जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया, क्योंकि चंदौसी की जिला बनाने की मांग भी काफी पुरानी थी।

कई दिनों तक संभल-चंदौसी शहर बंद रहे। रास्ता जाम रहा। जिले का हर संगठन ही नहीं बल्कि हर व्यक्ति क्षेत्रवाद में बंट गया। आखिरकार निर्णय हुआ कि मुख्यालय तीनों तहसीलों के मध्य में बनाया जाएगा। अफसरों ने अपना अस्थाई कार्यालय बहजोई विकास खंड कार्यालय में बनाकर बैठना शुरू कर दिया।
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इसके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ, सपा की अखिलेश यादव सरकार आई, तो सरकार ने 25 जुलाई-2012 को जिले का नाम भीमनगर से बदलकर संभल कर दिया। कैबिनेट मंत्री इकबाल महमूद हमेशा से ही संभल में मुख्यालय बनवाने की बात करते रहे हैं। एक सितंबर-2015 को पंवासा में जिला मुख्यालय बनाने का नोेटिफिकेशन जारी कर दिया गया। लेकिन सरकार ने स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया। पिछले एक साल में कई बार कैबिनेट की बैठक हुई लेकिन हर बार निराशा हाथ लगी, सरकार ने मुख्यालय निर्माण के लिए एक रुपये का भी बजट जारी नहीं किया। 


प्रदेश सरकार ने पंवासा में जिला मुख्यालय घोषित कर रखा है, मुख्यमंत्री ने शीघ्र बजट जारी करने का भरोसा भी दिलाया है, मैं तो लगातार प्रयास में जुटा हूं। शीघ्र ही बजट जारी होने के बाद कार्य भी शुरू होने की उम्मीद हैं।       -इकबाल महमूद, कैबिनेट मंत्री यूपी सरकार

मैं तो हर संभव प्रयास कर रही हूं कि जिला मुख्यालय चंदौसी तहसील क्षेत्र में बने। इसके लिए मुख्यमंत्री से कई बार मिलकर अपनी बात रख भी चुकी है। पंवासा में मुख्यालय से लोग नाराज हैं। मुख्यमंत्री जनभावनाओं को देखते हुए ही कोई लोकप्रिय निर्णय करेंगे।  -लक्ष्मी गौतम,  विधायक चंदौसी

जनपद स्तरीय अदालतों के न होने से वादकारी मुरादाबाद व बदायूं जाते हैं। चिट फंड एवं रजिस्ट्रेशन कार्यालय के लिए भी मुरादाबाद-बदायूं जाना पड़ता है। एडीएम, एएसपी, एआरटीओ के कार्यो के लिए संभल जाते हैं। कृषि विभाग, विद्युत विभाग, मत्स्य, वन विभाग आदि के कार्यो के लिए चंदौसी आते हैं। जिला कोषागार के लिए जिलेभर को संभल जाना होता है

इन विभागों के नहीं खुले कार्यालय 
जिला उद्योग केंद्र, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दुग्ध विकास केंद्र, सांख्यिकी विभाग, आडिट विभाग, चिट फंड रजिस्ट्रेशन विभाग,निबंधन विभाग का सीआरसी कार्यालय, जनपद न्यायालय एवं परिवार न्यायालय आदि जनपद स्तरीय न्यायिक  कोर्ट आदि।
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