सपा से छोटेलाल दिवाकर को प्रत्याशी घोषित करते हुए नेतृत्व ने उन्हें सिंबल भी दे दिया है। पार्टी ने तत्कालीन सपा प्रदेशाध्यक्ष की ओर से घोषित प्रत्याशी श्रीपाल दिवाकर और कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हुए सतीश प्रेमी को कोई तव्वजो नहीं दी है। हालांकि विधायक लक्ष्मी गौतम सपा की कलह के दौरान सीएम खेमे में रहने के कारण अपना टिकट पक्का मान रही थीं।
समाजवादी पार्टी ने तीन मौजूदा विधायकों को चुनावी मैदान में उतारने के दूसरे दिन चंदौसी से विधायक लक्ष्मी गौतम का टिकट काट दिया है। उनकी जगह छोटेलाल दिवाकर को प्रत्याशी बनाया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरनमय नंदा ने उन्हें सिंबल भी दे दिया है।
इससे सपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव की ओर से घोषित प्रत्याशी श्रीपाल दिवाकर और कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल होने वाले सतीश प्रेमी सहित अन्य दावेदारों को झटका लगा है। छोटेलाल को रास सांसद जावेद अली खां का करीबी माना जाता है। इस दौरान सांसद जावेद अली खां भी मौजूद रहे। हालांकि सपाई कुनबे में मचे सियासी घमासान के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खेमे में होने के कारण विधायक लक्ष्मी गौतम अपने टिकट को लेकर आश्वस्त थीं।
सपा जिलाध्यक्ष फिरोज खां का कहना है कि विधायक लक्ष्मी गौतम की संगठन से दूरी तो रही है, इसकी जानकारी हाईकमान को भी थी। पार्टी ने छोटे लाल दिवाकर प्रत्याशी घोषित किया है, सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ता उन्हें ही चुनाव लड़ाएंगे। जो लोग कुछ रूठे हैं, उन्हें मनाया जाएगा।
छोटेलाल को टिकट दिला जावेद ने दिखाई ताकत
चंदौसी(ब्यूरो)। चंदौसी विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान विधायक लक्ष्मी गौतम और तत्कालीन सपा प्रदेशाध्यक्ष शिवपाल यादव की ओर से घोषित प्रत्याशी श्रीपाल दिवाकर को दरकिनार कर छोटेलाल दिवाकर पर सपा ने दांव लगाया है। छोटेलाल को राज्यसभा सांसद जावेद अली का करीब माना जाता है। इससे जिले में जावेद अली ने अपनी ताकत का अहसास करा दिया है।
राज्य सभा सदस्य जावेद अली खां शुरूआत से ही सपा नेता प्रो.रामगोपाल यादव के करीबी हैं। बताया जाता है कि उन्होंने ही चंदौसी सुरक्षित सीट से छोटे लाल दिवाकर को टिकट दिए जाने की पैरवी की थी। वहीं, सपा जिलाध्यक्ष फिरोज खां का भी छोटेलाल को ही समर्थन होने की बात कही जा रही है। हालांकि, मौजूदा विधायक लक्ष्मी गौतम सपा की कलह के दौरान सीएम के खेमे में होने के कारण स्वयं के टिकट को लेकर आश्वस्त थीं। सपा प्रत्याशी छोटेलाल दिवाकर फत्तेपुर शमशोई गांव के निवासी हैं और दूध डेयरी का संचालन करते हैं। 2010 से सपा से जुड़े हैं। उनकी पत्नी ग्राम प्रधान हैं।
सीएम से मिले चंदौसी के दावेदार
संभल। जैसे ही छोटेलाल दिवाकर को टिकट दिए जाने की खबर मिली। चंदौसी सीट से टिकट के दावेदार तत्काल मुख्यमंत्री से मिलने पहुंच गए। विधायक लक्ष्मी गौतम और टिकट के दावेदार जुगुल किशोर वाल्मीकि ने सीएम से एक संग मुलाकात की। सीएम ने दोनों नेताओं को सुना पर टिकट कटने के सवाल पर कोई कमेंट नहीं किया। यह जरूर कहा कि चुनाव प्रचार में जुटें।
छोटेलाल मेरे भाई हैं, तन-मन-धन से चुनाव लड़ाऊंगा - श्रीपाल दिवाकर
संभल। टिकट कटने के तत्काल बाद हुई बातचीत में श्रीपाल दिवाकर ने कहा कि छोटेलाल दिवाकर उनके भाई हैं और वह उन्हें तन-मन-धन से चुनाव लड़ाएंगे। बताया, उन्हें मुलायम सिंह यादव ने उम्मीदवार घोषित किया था लेकिन अब अखिलेश यादव की सूची में उनका नाम नहीं है। यह फैसला नेतृत्व ने लिया है। इसलिए नेतृत्व के फैसले को मानेंगे।
हमसे का भूल हुई जो ये सजा ...
चंदौसी। 'आखिर ये किस कसूर की दी है मुझे सजा...' विधायक लक्ष्मी गौतम की खुद ही समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर उनका टिकट क्यों काटा गया ? चंदौसी की सुरक्षित विधान सभा सीट 2012 में सपा के टिकट पर निर्वाचित हुई लक्ष्मी गौतम अपने फसानों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहीं। कभी पति से अलगाव को लेकर तो कभी अपने करीबियों के कारण। लेकिन इस बीच शायद संगठन कहीं दूर छूट गया। सपा जिलाध्यक्ष से भी तकरार खूब हुई।
अंतिम समय तक भी लक्ष्मी गौतम को अखिलेश यादव पर भरोसा था लेकिन ना जाने क्या हुआ, प्रो.रामगोपाल यादव के करीबी जावेद अली खान की पैरवी ने विधायक के मंसूबों के पर कतर दिए।
यूं तो बदायूं जिले के फैजगंज बेहटा निवासी उच्च शिक्षित लक्ष्मी गौतम शिक्षक तो नहीं थी लेकिन घर के सामने ही विद्यालय होने के कारण व विद्यालय में अधिक बच्चे होने के कारण वह विद्यालय में जाकर बच्चों को पढ़ा देती थी। इसी दौरान उनकी नजदीकि इसी विद्यालय में इंचार्ज अध्यापक चंदौसी के दिलीप वार्ष्णेय से बढ़ गई। दिलीप वार्ष्णेय भी अपनी पत्नी से किनारा करने का मन बना चुके थे, इसलिए लक्ष्मी गौतम से प्यार की पींगे तेजी के साथ बढ़ गई।
दिलीप वार्ष्णेय की जुबानी वह 2006 से लक्ष्मी गौतम के साथ लिविंग रिलेशनशिप में आए। दो बेटियां भी हुई लेकिन पूर्व पत्नी से विधिवत तलाक नहीं होने के कारण लक्ष्मी गौतम से विधिवत शादी नहीं कर सके लेकिन दोनों पति पत्नी बन चुके थे, यही कारण हैकि 2012 के चुनाव में लक्ष्मी गौतम ने पति के नाम दिलीप वार्ष्णेय लिखा।
दिलीप वार्ष्णेय के अनुसार पूर्व पत्नी से नौ मार्च-2012 को तलाक हुआ तो 12 मार्च-2012 को लक्ष्मी गौतम से आर्य समाजी विधि से शादी की। जबकि लक्ष्मी गौतम छह मार्च-2012 को विधायक बन चुकी थी। इसके बाद चंदौसी के ही मुकुल अग्रवाल की नजदीकियों को लेकर दिलीप वार्ष्णेय-लक्ष्मी गौतम में तकरार बढ़ गई। आलम यह हो गया कि 29 मार्च-2013 को लक्ष्मी गौतम ने दिलीप वार्ष्णेय के घर को छोड़कर मुरादाबाद रामगंगा बिहार स्थित मकान में चली गई। दोनों की बीच सुलह कराने के भी बहुत प्रयास किए गए लेकिन सभी प्रयास व्यर्थ साबित हुए। इसी बीच मुकुल अग्रवाल से नजदीकियों के कारण विधायक के फंसाने लगातार सुर्खियां बनते रहे।
मौजूदा स्थिति में पति दिलीप वार्ष्णेय से तलाक का मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। इसी बीच सपा जिलाध्यक्ष फिरोज खां से भी ठन गई, दोनों ने एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए लेकिन बाद में सुलह हो गई। इससे विधायक की छवि को धक्का लगा, पार्टी ने इसे अच्छा नहीं माना।
हालांकि पिछले दिनों मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व शिवपाल सिंह यादव के बीच शुरू हुई सियासी जंग में विधायक मुख्यमंत्री के साथ खड़ी हुई, एक बार तो अखिलेश यादव की प्रत्याशी सूची में अपना नाम शामिल कराने में सफल भी हुई लेकिन आज अंतिम सूची जारी की गई तो प्रो.रामगोपाल यादव के करीबी राज्य सभा सदस्य जावेद अली खां अपने करीबी छोटे लाल दिवाकर को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। अंतिम समय में विधायक के हाथों से टिकट निकल गया।