गुन्नौर तहसील क्षेत्र की बाघऊ गांव के लोगों को टीसीएल का प्रबंधन बदलने की चर्चा के बाद दूषित पानी से निजात की उम्मीद बढ़ी है। गंाव के पानी के दूषित होने की पुष्टि कई साल पहले जल निगम की ओर से कराई गई जांच में हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद शासन प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। प्रबंधन बदलने की चर्चा के बीच ग्रामीणों ने नए प्रबंधन ने दूषित पेयजल के निजात दिलाने की गुहार लगाएंगे।
कई साल पहले जल निगम की ओर से बघाऊ गांव के पानी की जांच कराई गई थी। इसमें पानी के दूषित होने की पुष्टि की गई थी। ग्रामीण इसकी वजह टाटा केमिकल्स फर्टिलाइजर की ओर से छोड़े जाने वाले केमिकल्सयुक्त पानी को मान रहे हैं।
आइपीएफ संगठन के मुताबिक मिल के शुद्घ जल को अधिक मात्रा में अवशोषित कर अशुद्घ जल को भूमि में पुन: डाला जा रहा है जोकि आस-पास के क्षेत्र में छोटे और बड़े नलों में पेयजल के रूप में निकल रहा है। इससे कैंसर जैसेे भयंकर बीमारियों की आशंका है। इसकी मांग को लेकर आइपीएफ संगठन के प्रवक्ता अजीत सिंह यादव ने कई बार संभल के डीएम को शिकायत की।
तत्कालीन डीएम पवन कुमार ने सीडीओ की अध्यक्षता में बाघऊ गांव के पेयजल की जांच के लिए एक कमेटी बनाई। जिसमें सीएमओ, प्रदूषण विभाग के अलावा जल निगम के अधिकारी को सदस्य बनाया गया था। लखनऊ लैब में हुई जांच में बाघऊ का पेयजल दूषित पाया गया था।