बात आजादी से पहले की है। अंग्रेजी हुकूमत के आगे भारतीयों के सामने आजादी के आंदोलन सफल बनाने के लिए रणनीति बनाने और लोगों से संपर्क करने तक में मुश्किलें आ रही थीं। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने आजादी की लड़ाई के लिए रणनीति और संपर्क के लिए भगवान गणेश का सहारा लिया। गणेशोत्सव के बहाने वह लोगों से मिलकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खड़े होने के लिए संपर्क करते रहे।
एक तरफ गणेशोत्सव की धूम तो उत्साह और भीड़ के नजारे के पीछे आजादी की लड़ाई के लिए रणनीति चल रही थी। मुंबई में गणेशोत्सव की धूम आज भी खास मायने रखती है। चंदौसी में भी गणेश मेले के 55 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यहां स्वचालित झांकियों के साथ निकलने वाली रथयात्रा उत्तर भारत का एकमात्र आकर्षण है। रथयात्रा पांच सितंबर को निकाली जाएगी।
स्वचालित झांकियों को तैयार करने के लिए नौकरी पेशा युवा रात में महीनों कई-कई घंटे काम करते हैं। झांकियां किसी कारीगर या फिर पेशेवर से नहीं बनवाई जाती हैं।-हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक मेले में मुस्लिम समाज भगवान गणेश को लड्डू का भोग लगाता है। वहीं, हिंदू समाज के लोग खान बाबा की मजार पर चादरपोशी करते हैं।