कैबिनेट मंत्री नवाब इकबाल महमूद अपने ही बेटे की ओर से दी गई आम की दावत में नजर नहीं आए। खास मेहमान डीएम और एसपी भी नदारद रहे। सभी ने खुद को मसरूफ बताया। दावत में शामिल लोगों ने मंत्री जी और खास मेहमानों को अपने बीच न पाकर कहा कि अगर इस दावत में मंत्री जी और आला अफसर भी होते तो कुछ और बात होती। संयोग ही है कि पिछले साल जिस दिन आम की दावत दी गई थी उसी दिन भी किसी वजह से दावत को सादा करना पड़ा था। इस बार भी किसी वजह से इकबाल महमूद दावत में नहीं आ पाए। डीएम ने भी व्यस्तता की वजह से दावत में शिरकत न कर पाने की बात कही।
शहर के चुनिंदा 100 लोगों को कैबिनेट मंत्री इकबाल महमूद के आम के बगीचे में दी गई दावत के मेजबान कार्ड पर बेशक उनके बेटे शान इकबाल थे मगर अनौपचारिक रूप से माना जा रहा था कि उसके मेजबान मंत्री ही हैं। कई अफसर और सियासतदां अपना चेहरा दिखाने पहुंचे भी। आमों की बेहतरीन बेरायटी, जामुन और दूध का इंतजाम था। लेकिन खुद मंत्री इकबाल महमूद नहीं दिखे। साथ ही डीएम और एसपी भी नजर नहीं आए। इससे खुद को वीआईपी बताकर रौब गांठने वाले और मंत्री जी को चेहरा दिखाने की मंशा रखने वालों की दावत फीकी पड़ गई।
जो लोग दावत में दिखे उनमें एसडीएम जेबी सिंह और सीओ अफसर अब्बास जैदी तो दोपहर 12 बजे से पहले ही पहुंच गए। कुछ देर बाद ही अपर जिलाधिकारी विजय नारायन पांडेय और अपर पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित पहुंच गए। खुशनुमा माहौल में मंत्री के बेटे सुहेल इकबाल और शान इकबाल ने इनका इस्तकबाल किया। अफसरों, सियासतदां और मंत्री समर्थकों ने बाग में लगे तंबू के नीचे सोफे में अपनी जगह ली और इसके बाद मंत्री समर्थक और करीबी लोग उनके सोफों के पीछे खड़े हो गए। बाकायदा फोटो सेशन जैसा होने लगा।
इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक को कहना पड़ा-अरे पहले आम तो खा लीजिए। इसी दौरान अधिकारी मंडलाई के ग्राम प्रधान हिमायत उल्ला से रूबरू हुए। वहीं मंत्री पुत्र सुहेल इकबाल ने अधिकारियों से पूछा- कैसी लगी आम की दावत। एडीएम ने हंस कर जवाब दिया। अरे यह भी कोई पूछने की बात है। वातावरण भी बढ़िया और पार्टी भी बढ़िया। करीब एक घंटे में अफसर चले गए।