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Sambhal News: पति की मौत के बाद कराया जीवन बीमा, जांच में पकड़ा गया फर्जीवाड़ा, रिपोर्ट दर्ज

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संभल। असमोली थाना क्षेत्र के गांव गरवारा निवासी केला के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। बीमा कंपनी के अधिकारी की तहरीर पर यह रिपोर्ट दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि महिला ने अपने पति प्रकाश की मौत के दो महीने बाद उनको जिंदा बताते हुए जीवन बीमा कराया। बाद में फर्जी मृत्यु प्रमाण दिखाकर क्लेम पाने का प्रयास किया। जांच में यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। इसके बाद भी दूसरे फर्जी दस्तावेज बनवाए गए हैं। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की है।
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चंडीगढ़ के सेक्टर 56 निवासी उमेश कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया है कि उनकी कंपनी जीवन बीमा पॉलिसी करती है। भारत पे के माध्यम से ऑनलाइन भी यह सुविधा उपलब्ध है। लेकिन यह सुविधा भारत पे पर उन लोगों के लिए है, जिन्होंने खुद को व्यापारी के रूप में दर्ज किया है। इसी क्रम में गरवारा निवासी प्रकाश का जीवन बीमा कराया गया। जिसकी जोखिम पॉलिसी 4 दिसंबर 2020 से शुरू की गई।
31 जुलाई 2023 को बीमित की मृत्यु की सूचना मिली। इसमें बताया गया कि 24 जनवरी 2021 को मृत्यु हो गई थी। इसमें कारण भी स्पष्ट नहीं किया गया था। जांच की गई तो जानकारी मिली कि प्रकाश की मृत्यु 20 अक्तूबर 2020 को हो चुकी थी। जबकि पॉलिसी मृत्यु के दो महीने बाद कराई गई।
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बीमा कंपनी के अधिकारी का आरोप है कि मृत्यु प्रमाण फर्जी बनवाकर क्लेम किया गया जिसको नियमों के अनुसार निरस्त कर दिया। इसके बाद दोबारा से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराया। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर बीमा क्लेम पाने का प्रयास किया गया है। पुलिस ने महिला के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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बीमा क्लेम हड़पने वाले गिरोह के झांसे में तो नहीं आ गई महिला

जिस महिला ने ऑनलाइन जीवन बीमा अपने पति की मौत के बाद कराया है। वह न तो पढ़ी लिखी है और न परिवार का कोई सदस्य ऐसा है। ऐसे में पूरी आशंका है कि किसी गिरोह ने महिला को लालच देकर जीवन बीमा कराया और हड़पने के प्रयास में फर्जी दस्तावेज बनवा लिए हों। क्योंकि जिले में बीमा क्लेम हड़पने वाले गिरोह का बड़ा जाल फैला हुआ था। जिस पर पुलिस की लगातार कार्रवाई चल रही है। थाना प्रभारी का कहना है कि जांच की जा रही है। जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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ग्राम पंचायत ने दो फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिए
बीमा कंपनी के अधिकारी का दावा है कि ग्राम पंचायत गरवारा से दो अलग-अलग तिथि में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। पहला दावे के साथ संलग्न किया था, जिसको कंपनी ने निरस्त कर दिया था। इसके बाद दूसरा मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया गया। इसमें मृत्यु दावे के अनुसार ही दर्शाई गई। जबकि गांव में ही जांच पड़ताल में यह जानकारी सामने आई कि बीमा पॉलिसी करने से पहले ही प्रकाश की मृत्यु हो गई थी।
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