चंदौसी। चारों ओर से बंद प्लाई बोर्ड से बने विशाल हॉल में जैसे ही कदम रखते हैं, बाहर की भीड़-भाड़ और शोर पल भर में गायब हो जाता है। सामने होता है बर्फ से ढका विशाल हिमालय, उसकी गोद में ध्यानमग्न भगवान शिव और चरणों में कल-कल बहता पवित्र मानसरोवर। नजारा इतना जीवंत कि एक पल को लगता है जैसे आप सच में कैलाश के सामने खड़े हों।
चंदौसी के गणेश आश्रम में बनी यही मानसरोवर की झांकी इस बार मेले की जान बन गई है। करीब ढाई महीने की कड़ी मेहनत से तैयार हुई इस झांकी को देखने के लिए सिर्फ चंदौसी ही नहीं, संभल, मुरादाबाद, बदायूं तक से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। यूं तो गणेश चौथ मेले की रथयात्रा में निकलने वाली विशालकाय, स्वचालित देवी-देवताओं की झांकियां ही कारीगरों की कमाल की कारीगरी का सबूत होती हैं, लेकिन इस बार आयोजकों ने मेले से हटकर कुछ अलौकिक करने की ठानी और नतीजा सबके सामने है।
श्रद्धालुओं को झांकी तक पहुंचने के लिए करीब आधा किलोमीटर लंबा घुमावदार, भूल-भुलैया जैसा रास्ता तय करना पड़ता है। इस पूरे सेट-अप को आकार देने में 15 कारीगरों ने 75 दिन तक दिन-रात एक कर दिया। मुख्य रूप से चार कुशल कारीगरों ने एक महीने से अधिक समय तक बारीक काम कर इसे अंतिम रूप दिया। झांकी के मुख्य शिल्पी मुकेश वार्ष्णेय बताते हैं कि इस झांकी को हूबहू असली जैसा बनाने के लिए सारा सामान दिल्ली से मंगाया गया।
इसमें एक क्विंटल तांबे की क्वाइल, तीन-तीन टन क्षमता के दो बड़े कंप्रेसर, फाइबर शीट, कृत्रिम हरी घास, फूल-पत्तियां और विशेष लाइटिंग का इस्तेमाल किया गया है। मूल रूप से चंदौसी के ही रहने वाले मुकेश वार्ष्णेय पिछले 30 सालों से गणेश मेले की रथयात्रा के लिए चलती-फिरती स्वचालित झांकियां बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले वह इसी स्थान पर बाबा बर्फानी अमरनाथ की झांकी भी बना चुके हैं, जिसे खूब सराहना मिली थी।
शाम छह बजे खुलते हैं कपाट, रात एक बजे होती है शयन आरती
भक्तों के लिए इस कैलाश के कपाट रोज शाम 6 बजे खुलते हैं। इससे पहले शाम 4 बजे से ही पहाड़ पर बर्फ जमाने के लिए कूलिंग सिस्टम शुरू कर दिया जाता है, ताकि अंदर का तापमान हिमालय जैसा बना रहे। सबसे पहले भगवान शंकर की भव्य आरती होती है, जिसके बाद दर्शन के लिए लंबी कतार लग जाती है। देर रात 1 बजे शयन आरती के बाद ही झांकी के पट बंद होते हैं। पूरे दिन यहां प्रसाद और दान का क्रम चलता रहता है और दर्शन करने आए हर श्रद्धालु को अलग-अलग तरह के मिष्ठान और फलों का प्रसाद वितरित किया जाता है।