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संभल हिंसा: चौथी बार न्यायिक आयोग की टीम ने शुरू की कार्रवाई, अफसर और पीड़ित पहुंचे बयान दर्ज करवाने

Fri, 28 Feb 2025 12:52 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल

सार

संभल बवाल की न्यायिक जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग की टीम शुक्रवार और शनिवार को शहर में रहेगी। टीम आम जनता और अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान दर्ज कर रही है। रिटायर्ड जज देवेंद्र अरोड़ा की अध्यक्षता में गठित आयोग में पूर्व डीजीपी एके जैन और पूर्व आईएएस अमित मोहन प्रसाद सदस्य हैं।
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संभल पहुंचा न्यायिक आयोग - फोटो : संवाद
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विस्तार
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जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग की टीम चौथी बार शहर पहुंची। आयोग से जुड़े पदाधिकारी शुक्रवार को संभल के पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में लोगों और अफसरों के बयान दर्ज कर रहे हैं। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन भी गेस्ट हाउस पहुंचे।

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आयोग के सदस्य शनिवार को भी जिले में रहेंगे और बवाल के दौरान तैनात पुलिस प्रशासन, गवाहों और अन्य संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करेंगे। इससे पहले भी आयोग तीन बार संभल आकर जांच कर चुका है। गौरतलब है कि 24 नवंबर को जामा मस्जिद में हुए सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी।

इस घटना में पांच लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 29 पुलिसकर्मी और कई अन्य लोग घायल हो गए थे। उपद्रवियों ने पुलिस पर फायरिंग की थी और आगजनी व तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई थीं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी।
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इस घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था। इसमें रिटायर्ड जज देवेंद्र अरोड़ा को अध्यक्ष बनाया गया। उनके साथ रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी और पूर्व डीजीपी एके जैन तथा रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद सदस्य के रूप में शामिल हैं।

आयोग की टीम सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है। इसका उद्देश्य बवाल के कारणों, दोषियों की भूमिका और प्रशासन की कार्रवाई की विस्तृत पड़ताल करना है। 

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सभी दंगों की रिपोर्ट हो रही तैयार
संभल पुलिस शहर में 1978, 1986 और 1992 में हुए दंगों की जांच पड़ताल करने में जुटी है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजा जाएगी। एसपी का कहना है कि शासन स्तर से जो भी निर्देश मिलेंगे उसके आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी। उसके आधार पर ही उन तीनों दंगों की रिपोर्ट तैयार हो रही है। बताया कि मुकदमों की स्थिति को भी देखा जाएगा।

23 जनवरी को न्यायिक जांच आयोग के सामने कुछ लोग पहुंचे थे। उन्होंने 1978, 1986 और 1992 के दंगों से पीड़ित होने की बात कही थी। साथ ही बताया था कि उन्हें इन तीनों दंगों में जान और माल का नुकसान हुआ था लेकिन न्याय नहीं मिला। इन परिवारों ने जांच कराने के लिए मांग उठाई थी।

इसी मांग को मानते हुए रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। एसपी का कहना है कि दंगों में कितने लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी और उन मुकदमों में क्या स्थिति है। इन सभी बिंदुओं को देखते हुए रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उसके बाद शासन को भेजी जाएगी। रिकॉर्ड मुरादाबाद में है। इसलिए समय लग रहा है। 

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