हजरत इमामे हुसैन रदियल्लाहो अन्हु की बारगाह में बेहतरीन अकीदत यही है कि उनके नानाजान की मुबारक सुन्नतें व अहकाम पर अमल किया जाए। हुसैनी पैगाम को आम करने के लिए कोशिश करनी चाहिए। यह विचार सातवें मोहर्रम के हवाले से इमामे ईदगाह मौलाना सुलेमान अशरफ हामिदी ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि नवासा- ए रसूल ने मैदाने कर्बला में तलवारों के साए में भी नमाजे कजा नहीं होने दी तो आज उनकी मोहब्बत का दावा करने वालों के लिए जरुरी है कि हजरत इमामे हुसैन के पैगाम पर अमल करें। अपनी जिंदगी में नमाजों को अहमियत दें। उन्होंने कहा कि हजरत इमामे हुसैन की बारगाह में लंगर तकसीम करना, सबील लगाना और गरीबों की मदद करना बेशक जायज अमल है मगर मोहब्बते रसूल और गुलामी-ए-हुसैन का असली मकसद शरीअत पर अमल करना है।
दीन-ए- इस्लाम की हक्कानियत और तहफ्फुज के लिए जान कुर्बान करने का जज्बा पैदा किया जाए है। हुसैन-ए- -पाक की सीरत पर अमल करके फरमाबरदारी-ए-खुदा व रसूल का हक अदा किया जाए।