संभल। नगर के खग्गू सराय में स्थित परियों वाला मंदिर की धर्मशाला की जमीन को बेचे जाने की जांच की गति धीमी हो पड़ गई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि रस्तोगी समाज के लोगों ने धर्मशाला की जमीन के बैनामे कराए थे। पालिका के ईओ मणिभूषण तिवारी का कहना है कि जांच का मुख्य बिंदु यह है कि यह बैनामे किसने और किस आधार पर कराए थे। क्योंकि धर्मशाला बेची नहीं जा सकती थी। इसके बाद भी इसका बैनामा करा दिया गया।
खग्गू सराय में परियों वाला मंदिर प्राचीन है। 1978 तक इस इलाके में काफी हिंदू आबादी रहा करती थी। 1978 का दंगा हुआ तो हिंदू आबादी ने पलायन कर दिया। इसके बाद इस इलाके में जो भी हिंदू समुदाय के लोगों के घर व जमीन थीं वह बेच दीं। परियों वाला मंदिर के नजदीक ही धर्मशाला हुआ करती थी। जो पालिका के रिकॉर्ड में दर्ज है। वह भी गुमनाम हो गई। डीएम से किसी ने शिकायत की थी कि दूसरे समुदाय के लोगाें ने परियों वाला मंदिर की धर्मशाला पर कब्जा कर लिया है। इस शिकायत के बाद जांच शुरू हुई थी।
जांच में सामने आया कि रस्तोगी समाज के लोगों का ही परियों वाला मंदिर पर अधिकार था और उन्होंने ही धर्मशाला का बैनामा दूसरे समुदाय के लोगों को करा दिया था। दूसरे समुदाय के लोगों ने बैनामे भी दिखाए। इसके बाद जांच यह शुरू हुई कि यह बैनामे किस आधार पर किए गए।
ईओ का कहना है कि जांच अभी चल रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह बैनामे किसने किए और किस आधार पर किए। ईओ ने बताया कि धर्मशाला थी यह रिकॉर्ड में दर्ज है और धर्मशाला को बेचा नहीं जा सकता यह नियम है।