इसे जागरूकता का अभाव कहें या फिर जिम्मेदारों की शिथिलता। देशभर में स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए सिटीजन फीडबैक चल रहा है लेकिन संभल में इसकी प्रगति बेहद खराब है। पिछले वर्ष के मुकाबले अभी आधा फीडबैक भी नहीं हो पाया है। शहर को अव्वल बनाने के लिए न लोग जागरूक दिख रहे हैं और न ही जिम्मेदार। नतीजा यह है कि स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए फीडबैक लेने में नगर पालिका परिषद फिसड्डी साबित हो रही है।
स्वच्छता रैंकिंग के लिए क्यूसीआई टीम का सर्वे शुरू हो चुका है, इसक्रम में टीम नगरवासियों का फीडबैक लेने का कार्य कर रही। इसमें अधिक से अधिक नगर वासियों को भाग लेकर शहर की स्वच्छता के प्रति अपने पक्ष को क्यूसीआई के सवालों के जवाब के रुप में अपनी बातों को रखना है। शहर वासियों के फीड बैक के आधार पर ही शहर के स्वच्छता की रैंकिंग तय की जाएगी।
हालांकि नगर पालिका ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था की है, इसके लिए सुपरवाइजरों की तैनाती की गई है। कर्मचारियों को अधिक से अधिक सिटीजन का फीडबैक दिलाने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इसमें कोई खास प्रगति होती नहीं दिख रही। फरवरी माह से फीडबैक लेने का कार्य शुरू है। इसकी अंतिम तिथि 31 मार्च थी, लेकिन इसको बढ़ाकर अब 15 अप्रैल किया गया है। इस तरह से अंतिम तिथि में सिर्फ छह दिन शेष बचे हैं, जबकि नगर पालिका बीते वर्ष के तुूलना में लक्ष्य से कोसों दूर है। बीते वर्ष 15 हजार लोगों ने अपना फीड बैक दिया था, इस बार अभी तक केवल 6600 फीडबैक मिले है।
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इनसेट
डोर-टू-डोर के सुपरवाइजरों को सख्त निर्देश, हर हाल में कराएं फीडबैक
संभल। दरअसल, स्वच्छता में शहर की रैंकिंग सुधारने में नागरिकों का यह योगदान बड़ा सहायक हो सकता है। फीडबैक में सिर्फ नागरिक को शहर के नाम के साथ सफाई व्यवस्था कैसी, सड़कों का क्या हाल है, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन जैसे सवालों के जवाब देने होंगे। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के संचालक उदित मोहन सांख्यधर बताते हैं कि सुपरवाइजरों की अलग-अलग टीमें इस पर काम कर रही हैं। नागरिकों में जागरूकता की कमी है, जिसकी बजह से फीडबैक की प्रगति अच्छी नहीं है। शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल बनाने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं। टीमों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह किसी भी हाल में नागरिकों से फीडबैक कराएं।
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फीडबैक के लिए नगरवासियों को करना है यह कार्य
संभल। एसएस-2022 नाम से गूगल प्ले स्टोर से एप डाउनलोड कर लें। इसमें शहर का नाम डाले और नाम के साथ सफाई व्यवस्था कैसी, सड़कों का क्या हाल है, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन जैसे सवालों के जवाब दें। इसके बाद मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा, जिससे फीडबैक की पुष्टि होगी। ओटीपी को ऑनलाइन ही दर्ज करना होगा।
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कोट
स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए सिटीजन फीडबैक चल रहा है। अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान में हिस्सा लें, ताकि उनके सवालों के जवाब से अंकों के साथ रैंकिंग में भी सुधार हो। डोर-टू-डोर के सभी कर्मचारियों को अधिक से अधिक सिटीजन का फीडबैक दिलाने के निर्देश दिए गए हैं।- उदित मोहन सांख्यधर, डोर-टू-डोर के संचालक।