संभल।
संभल अनेक परंपराओं, प्राचीनताओं, सभ्यताओं का प्रेरणास्रोत रहा है। यहां का जनमानस भगवान श्री कल्कि विष्णु का ब्रांड एंबेसडर है। सम्राट पृथ्वीराज चौहान की राजधानी रहा संभल भविष्य में संपूर्ण सृष्टि का संचालन करेगा। इसलिए यहां का इतिहास यहां की परंपराएं सदैव जीवंत रहे, इसके लिए विशेष ग्रंथ का प्रकाशन होना जरूरी है। यह बात इतिहासकार प्रोफेसर विघ्नेश कुमार ने इतिहास संकलन समिति की ओर से आयोजित प्रांतीय अधिवेशन में कही।
नगर के दुर्गा कॉलोनी स्थित एक पैलेस में रविवार को अधिवेशन में युग युगीन संभल महात्म्य विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में इतिहासकारों, विदुषी और मूर्धन्य विद्वानों के द्वारा संभल के आध्यात्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व को जाना, सुना और समझा गया। समिति के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. बालमुकुंद पांडे ने कहा कि एकता में ही शक्ति है।
इस सूत्र को न केवल संभलवासियों को बल्कि संपूर्ण देशवासियों को समझना होगा। उन्होंने हिंदू समाज के प्रत्येक व्यक्ति से हरिहर मंदिर की भूमि का पुत्र और भगवान श्री कल्कि विष्णु का वंशज होने पर गर्व की अनुभूति करने पर जोर दिया। कहा कि वेद पुराण और शास्त्र में लिखी एक-एक बात सदैव सत्य सिद्ध होती रही है और सदैव सत्य सिद्ध होगी। इसके अनुसार भगवान श्री कल्कि विष्णु का अवतार संभल की धरा पर होने के कारण यह विश्व भर की विशिष्ट पुण्य भूमि, धर्म भूमि, अवतार भूमि है। अध्यक्षता प्रांत संरक्षक प्रोफेसर आराधना ने की। संचालन सुबोध कुमार गुप्ता और विकास कुमार वर्मा ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर विष्णु कुमार शर्मा, श्री गोपाल शर्मा, विभोर बंसल, विनोद शर्मा, अतुल शर्मा, उमेश सैनी, श्री ओमचंद्रा, राजेंद्र गुर्जर, सरिता गुप्ता, सुनीता यादव आदि माैजूद रहे।