गणेश चतुर्थी मेले में मेले के संस्थापक डॉ. गिरिराज किशोर गुप्ता की स्मृति में नटराज मंच पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मंगलवार की रात मेला ग्राउंट के नटराज मंच पर प्रारंभ हुए कवि सम्मेलन में लखनऊ से आए कवि पंकज प्रसून ने सड़कों को लेकर व्यंग किया कि इतने उत्साहित हैं नेता जाने क्या कर जाएंगे, इतना प्यार करो न हमसे जीते जी मर जाएंगे। मैंने पूछा आखिर कब तक गड्ढा मुक्त बनेगी सड़कें, वह बोले बारिश आने दो सब गड्ढे भर जाएंगे।
फरीदाबाद से आए कवि दीपक गुप्ता ने कहा कि आपको हम रब समझते हैं, आप हमको कब समझते हैं, हम कहें क्यों आपको शातिर, आपको तो सब समझते हैं। देहरादून से कवि आए श्रीकांत ने सुनाया कि भले ही दीप से पूजा तू आठोयम मत करना, मिले कोई मोहल्ले में तो राधेश्याम मत करना। नमन करना या मत करना कोई कुछ न करेगा पर, शहीदों की शहादत को कभी बदनाम नहीं करना।
दिल्ली से आए कवि योगेंद्र सुंदरियाल ने सुनाया कि मां की लोरी, गांव की गोरी, ब्रज की होली का वर्णन है, काली कोयल पानी कलकल पांव की जयल की छनछन है। पीर पराई ब्याह सगाई देवर भाभी की अनबन है, कविता केवल शब्द नहीं है कविता कवि का अंतर्मन है।
इसके उपरांत मेरठ से आई कवियत्री डॉ. शुभम त्यागी ने सुनाया कि चांद को तन्हा तकने लगी आजकल, कहती मां है सयानी हुई आजकल। सामने बैठ दर्पण के इठलाके मैं, बात खुद से ही करने लगी आजकल। सुन सभी दर्शकों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया। संचालन कर रहे सौरभ कुमार ने अपनी कविता पाठ करके सभी का मन मोह लिया। इस अवसर पर एसडीएम राजपाल सिंह, सीओ दिनेश कुमार, प्रभारी निरीक्षक दीपक कुमार, वेद प्रकाश गुप्ता, मेला कोतवाली इंचार्ज राकेश कुमार, हरिगोपाल वार्ष्णेय, ललित किशोर गुप्ता, विनय सराफ, सुधीर गुप्ता, रविंद्र कुमार रूपी, डा. राजीव गुप्ता आदि मौजूद रहे।