दहेज हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश-विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट ने दोषी पति को दस साल और सास-ससुर को सात-सात कैद की सजा सुनाई है। साथ ही दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। बरेली जनपद अंतर्गत थाना आंवला के गांव महमूदपुर निवासी गीता की शादी 2017 में चंदौसी के गांव असालतपुर जारई निवासी सिंटू पुत्र चंद्रसेन के साथ हुई थी।
चार जून 2018 की शाम गीता की आग में झुलसकर मौत हो गई थी। मृतका के मामा बनियाठेर के गांव अजीमगंज निवासी राजपाल सिंह ने पांच जून 2018 को बनियाठेर थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि भांजी गीता की शादी में उन्होंने काफी दान-दहेज दिया था। इसके बाद भी ससुराल पक्ष के लोग दहेज से खुश नहीं थे और भांजी को प्रताड़ित करते थे।
आरोप लगाया कि चार जून 2018 की शाम पति और ससुराल पक्ष के लोगों ने उसकी भांजी के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। जिसमें वह बुरी तरह झुलस गई। उन्होंने उसे चंदौसी सीएचसी में भर्ती कराया। जहां से डॉक्टरों ने उसे मुरादाबाद के लिए रेफर कर दिया था। मुरादाबाद ले जाते समय रास्ते में भांजी की मौत हो गई थी।
पुलिस ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया था। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश-विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट संभल स्थित चंदौसी अशोक कुमार के न्यायालय में हुई। सुनवाई के दौरान पति सिंटू, ससुर चंद्रसेन सहित सास राजेश्वरी देवी दोषी पाए गए।
कोर्ट ने दोषी पति सिंटू को दस वर्ष और सास-ससुर को सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दस-दस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।