संभल। नवंबर 2024 के संभल बवाल की गूंज जब लखनऊ तक पहुंची और इस दौरान मारे गए लोगों का मुद्दा विपक्ष द्वारा उठाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभल के पुराने दंगों की जांच रिपोर्ट पेश किए जाने के निर्देश दिए थे। संभल के दंगाई इतिहास में सबसे बड़ा दंगा 1978 का है, जिसमें कई लोग मारे गए थे और दो महीने शहर में कर्फ्यू रहा था। सीएम के निर्देश पर पुराने दंगों की रिपोर्ट तैयार कर रहे पुलिस प्रशासन के सामने तब के दंगों के रिकॉर्ड तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन गई है।
अफसरों का कहना है कि तब मुरादाबाद जनपद में आने वाले संभल शहर से जुड़ी फाइलें और अन्य रिकॉर्ड हाथ नहीं आया है। कोशिशों के बाद अब तक मुरादाबाद से भी इस रिकॉर्ड का पता नहीं चल सका है। तलाश में 1993 में यूपी के विशेष सचिव न्याय आरडी शुक्ला की ओर से जारी पत्र हाथ लगा है, जिसमें 78 के दंगे में पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज 16 मुकदमों में से आठ को वापस ले लिए जाने की जानकारी दी गई है। 23 दिसंबर 1993 को यह पत्र मुरादाबाद के तत्कालीन डीएम को जारी किया गया था।
उस समय यूपी में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे। तब जिन जिन आठ मुकदमों को वापस लिया गया था, उनमें आगजनी, लूट और अन्य गंभीर धाराओं के मामले दर्ज थे। वापस नहीं लिए गए आठ मुकदमे दंगे के दौरान हुई हत्याओं के थे। पुराने दौर के लोग बताते हैं कि बचे मुकदमों में से अधिकांश में तब की पुलिस आरोप सिद्ध नहीं कर सकी थी, जिससे ज्यादातर आरोपी दोषमुक्त हो गए थे। संभल पुलिस अभी इन बाकी बचे मुकदमों की ताजा स्थिति का ब्योरा भी नहीं जुटा सकी है।
संभल के स्थानीय लोगों का कहना है कि सन 78 के दंगे के दर्ज मामलों में मरने वालों की संख्या आठ दिखाई गई थी, जबकि जान गंवाने वाले इससे कहीं ज्यादा थे, जिनमें अधिसंख्य हिंदू थे। यही नहीं तब हुए दंगे के समय मिश्रित आबादी में रहने वाले 40 रस्तोगी परिवार मोहल्ला छोड़ने को मजबूर हो गए थे। बाद में इनमें से कई शहर और स्थानीय कारोबार छोड़कर दूसरे शहरों में जा बसे थे।
24 नवंबर 2024 को संभल जामा मस्जिद के सर्वे के दूसरे चरण के दौरान हुए बवाल की जांच के लिए जब न्यायिक आयोग की टीम आई थी तो सन 78 के पीड़ितों ने अपनी व पूर्वजों की आपबीती बताकर न्याय की मांग की थी। इसका संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शासन ने 1978 के दंगे की फाइलें निकालकर वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा था। साथ ही विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में कहा था कि संभल के अब तक के दंगों में 209 हिंदुओं की जान गई थी। 1978 के दंगों पर सीएम की टिप्पणी के बाद से ही पुलिस-प्रशासन के अधिकारी पुराने रिकॉर्ड की तलाश में लगे हैं, जो अब तक नहीं मिल सका है।
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... कहीं गायब तो नहीं कर दिया गया 78 के दंगों का रिकॉर्ड
संभल में सन 78 के दंगों की आग में झुलसे हिंदू परिवार और भाजपा नेता पुराना आपराधिक रिकॉर्ड न मिलने पर सवाल उठा रहे हैं। इनका कहना है कि सन 93 में इस दंगे से जुड़े आधे (आठ) केस वापस लेने के दौरान कहीं शेष आठ मुकदमों का रिकॉर्ड गायब तो नहीं कर दिया गया। यह सवाल उठाने वालों का मानना है कि अगर पुराने दंगों की गहराई से जांच हो जाए तो उस दौर के तमाम वो चेहरे बेनकाब हो सकते हैं, जिन्होंने राजनीतिक मंसूबों को पूरा करने के लिए समय-समय पर संभल को दंगे की आग में झोंका था।
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सन 78 के दंगों में 82 आरोपी बनाए गए थे, 72 भेजे गए थे जेल
पुलिस को अब तक मिले रिकॉर्ड के अनुसार 1978 के दंगे के बाद दर्ज मुकदमों में 82 लोग आरोपी बनाए गए थे। इनमें से 72 जेल भेजे गए थे लेकिन आरोप सिद्ध न होने से ज्यादातर छूट गए थे। इस दंगे के बाद ही हिंदू आबादी पलायन करने के लिए मजबूर हो गई थी। जिन लोगों की जान गई थी और जिनकी संपत्तियां हाथ से निकल गई थीं, उनके परिजनों को आज भी इंसाफ का इंतजार है। शासन के पुराने दंगों पर सख्त रुख के बाद से इन लोगों में इंसाफ की उम्मीद जगी है।
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मेरी दुकान व कीमती सामान जला था, मुआवजा सिर्फ 200 रुपये मिला था
संभल शहर के मोहल्ला ठेर निवासी विष्णु सरन रस्तोगी की 78 के दंगे में दुकान जला दी गई थी। दुकान में रखा हजारों रुपये का माल खाक हो गया था। वह बताते हैं कि इंसाफ के नाम पर तब मुआवजे के रूप में महज 200 रुपये मिले थे। इस मामले में किसी को सजा नहीं हुई थी। उनका कहना है कि पुराने दंगों की जांच दोबारा होनी चाहिए। जो परिवार प्रभावित हुए थे उनको इंसाफ मिलना चाहिए।
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मंजरशफी ने बिगाड़ा था... संभल का मंजर, दो महीने रहा था कर्फ्यू
पुराने लोग बताते हैं कि 29 मार्च 1978 को तब की राजनीति में सक्रिय रहे मंजरशफी ने दंगे की चिंगारी सुलगाई थी। वह एक कॉलेज के विरोध में जुलूस निकाल रहा था। वह जुलूस के रास्तों की दुकानों को बंद कराना चाहता था। उस दौरान हिंदू दुकानदारों ने दुकान बंद करने से इन्कार किया तो वह विवाद पर आमादा हो गया था। झगड़ा बढ़ा तो किसी ने अफवाह फैला दी कि मंजरशफी की हत्या कर दी गई है। इसके बाद बवाल शुरू हो गया और देखते-देखते संभल दंगे की आग में जल उठा था। जैसे-तैसे पुलिस ने हालात पर काबू पाया था लेकिन अगले दिन फिर आगजनी की घटनाएं हुईं। इसके बाद कर्फ्यू लगा दिया गया था, जो हालात न सुधरने के कारण दो माह तक कायम रहा। यह पूरी घटना न्यायिक जांच आयोग के सामने 23 जनवरी 2025 को उन परिवाराें ने बताई जो सन 78 के दंगा पीड़ित परिवारों से हैं।
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एसपी का कोट
रिकॉर्ड पुराना है और उस समय संभल मुरादाबाद जिले का हिस्सा हुआ करता था। पुराने रिकॉर्ड को तलाशा जा रहा है। पूरा रिकॉर्ड नहीं मिल सका है। रिकॉर्ड मिलने पर 78 के दंगे की फाइल शासन को भेजी जाएगी। - कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी संभल
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