संभल। त्योहारों के मौसम में खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी एक गंभीर समस्या है। इसकी गवाही खाद्य पदार्थों के फेल नमूने दे रहे हैं। इन मिलावटखोरों के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई हुई है। दिक्कत यह है कि जिस त्योहार पर नमूना लिया जाता है, उसकी रिपोर्ट तब नहीं पाती है। रिपोर्ट में देरी से पता नहीं चलता कि मिलावट है या नहीं। जाहिर है कि जो मिलावटी खाद्य पदार्थ नष्ट होने से बच जाते हैं, वह आम लोगों के पेट में ही जाते हैं।
पिछले वित्तीय वर्ष में अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक 510 नमूने लिए गए थे। एडीएम कोर्ट से 256 नमूने फेल होने पर 1.43 करोड़ रुपये जुर्माना भी लगाया गया। जबकि 254 मामलों की रिपोर्ट लंबित हैं। अप्रैल 2026 से जुलाई 2026 तक 110 नमूने लिए गए थे। अगस्त में भी 25 नमूने ले लिए गए हैं। इन सभी नमूनों को लैब भेज दिया गया है। इन नमूनों को लेने के दौरान वही पदार्थ नष्ट कराए गए हैं, जो टीम को प्रारंभिक जांच में खराब दिखाई दिए।
खाद्य विभाग के सहायक आयुक्त ग्रेड टू ने बताया कि प्रारंभिक जांच में जो खाद्य सामग्री खराब लगती है उसको नष्ट करा दिया जाता है। दूध और दूध के उत्पाद ही पता लग पाते हैं। बाकी खाद्य सामग्री के नमूने लैब ही भेजे जाते हैं।
मोबाइल वैन की रिपोर्ट भी प्रामाणिक नहीं
लोगों का मानना है कि त्योहारों पर मोबाइल वैन से खाद्य पदार्थों की जांच होनी चाहिए। इससे मौके पर ही कुछ जानकारी स्पष्ट हो जाती है। इससे मिलावटी वस्तुओं की बिक्री रोकी जा सकेगी। उपभोक्ता मिलावट से बच सकेंगे और उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा। हालांकि सहायक आयुक्त ग्रेड टू का कहना है कि मोबाइल वैन की रिपोर्ट प्रामाणिक नहीं होती है। लैब की रिपोर्ट ही मान्य होती है। जिसके आधार पर कार्रवाई होती है।
नियमों से बंधा विभाग, आशंका पर ही नष्ट की हो सकती है कार्रवाई
खाद्य विभाग के नियमों में ही अधिकारी बंधे हुए हैं। नमूना लैब से ही जांचा जाएगा और उसकी रिपोर्ट पर ही जुर्माना लगेगा। गंभीर मिलावट पर सीजेएम कोर्ट में मामला चलेगा। जिसमें सजा भी होती है। हालांकि पिछले वित्तीय वर्ष में एडीएम कोर्ट से ही जुर्माना लगा है। इसमें दूध, मिठाई के नमूने सबसे ज्यादा शामिल हैं।
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त्योहारी सीजन में मिठाई स्वास्थ्य के लिए चुनौती
रक्षा बंधन से लेकर दिवाली तक मिठाई की खूब बिक्री होनी है। जबकि सबसे ज्यादा मिलावट भी मिठाई में होती है। इसमें रसायन की मिलावट से लेकर रंग तक मिलाए जाते हैं। एक्सपायरी तीन दिन अधिकतम मानी जाती है। कई-कई दिन पुरानी मिठाई की बेच दी जाती है। त्योहारों पर बिक्री ज्यादा होती है तो कई दिन पहले ही मिठाई बननी शुरू हो जाती है।
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त्योहारी सीजन को देखते हुए लगातार नमूने लिए जा रहे हैं। लैब भेजे जा रहे हैं। मौके पर टीम को दूध या उससे बने उत्पादों में मिलावट का अंदेशा रहता है तो नष्ट कर दिया जाता है। इसमें दुर्गंध या रसायन पदार्थ मिलने पर यह अंदेशा साफ हो जाता है। यह कार्रवाई पूरे त्योहारी सीजन तक चलेगी।
मानवेंद्र सिंह, सहायक आयुक्त ग्रेड टू, खाद्य विभाग