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हिमाचल पुलिस की कॉल ने गिरा दी परिवार पर बिजली

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चंदौसी। हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसे में चंदौसी की युवती और उसके मंगेतर समेत चार की मौत की सूचना पंजाबी कॉलोनी में रहने वाले साहनी परिवार पर बिजली गिरा गई। दवा कारोबारी संजय साहनी की बेटी सलोनी की असमय मौत की जानकारी ने जहां पिता समेत अन्य परिजनों को भीतर तक झकझोर कर रख दिया, वहीं पूरी कॉलोनी के लोगों को इस जानकारी से गहरा सदमा लगा।
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सलोनी साहनी (27) दिल्ली में आईसीआईसीआई बैंक में काम करती थी। उसी बैंक में काम करने वाले करनाल (हरियाणा) के विश्वास सरदाना के साथ उसकी शादी तय हो चुकी थी। ये दोनों उसी बैंक में कार्यरत अन्य साथियों संग पर्यटन के लिए कुल्लू-मनाली घूमने गए थे। गाड़ी गहरी खाई में पलट जाने से सलोनी और विश्वास समेत चार की मौत हो गई।
यह जानकारी हिमाचल प्रदेश की पुलिस द्वारा सोमवार सुबह फोन पर सलोनी के परिजनों को दी गई। बेटी के न रहने की सूचना सुनते ही पिता संजय साहनी सन्न रह गए। उन्हें बेटे ने सहारा दिया। इसके बाद बेटे ने कुछ रिश्तेदारों व परिचितों के साथ तत्काल हिमाचल प्रदेश के लिए सफर शुरू कर दिया। इस बीच दुखद हादसे की सूचना पर पंजाबी कॉलोनी के लोग तथा परिवार के अन्य परिचित संजय के घर जुटने लगे। सभी उस दुखद घड़ी को कोसते नजर आ रहे थे, जिसमें यह हादसा हुआ।
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मां को नहीं दी बेटी की मौत की जानकारी
चंदौसी। पंजाबी कॉलोनी निवासी सलोनी की सड़क हादसे में मौत की जानकारी मृतका की मां रितु साहनी तथा परिवार की अन्य महिलाओं को नहीं दी गई है। घर और दरवाजे के बाहर सांत्वना के लिए जमा होने वाले लोग इशारों में संवाद कर रहे थे। परिजनों को डर है कि बेटी के न रहने का सच सामने आते ही रितु की हालत बिगड़ सकती है। संवाद
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दिसंबर में होनी थी शादी
चंदौसी। हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसे में जान गंवाने वाली सलोनी और उसके मंगेतर विश्वास सरदाना की शादी की तैयारियां तेजी पर थीं। परिजनों ने दिसंबर में शादी समारोह की योजना बनाई थी। गुजरते वक्त के साथ समारोह को लेकर परिजनों का उत्साह बढ़ता जा रहा था। सोमवार को आई अमंगलकारी सूचना ने सभी के अरमानों पर पानी फेर दिया। संवाद
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कौन बांधेगा करन की कलाई पर राखी
चंदौसी। पंजाबी कॉलोनी निवासी संजय साहनी व रितु साहनी के घर में बेटी सलोनी के अलावा बेटा करन है। हादसे में सलोनी के न रहने की जानकारी से करन दोहरे दबाव में घिर गया।
एक तरफ हृदयविदारक जानकारी के बाद पिता को संभालने और मां से सच छिपाने का दबाव था। दूसरी ओर जल्द से जल्द बहन के शव तक पहुंचने की बेचैनी। रह-रह कर बड़ी दीदी सलोनी का चेहरा भी आंखों में तैर रहा था। साथ ही मन में सवाल उठ रहा था कि अब रक्षाबंधन पर उसे कौन राखी बांधेगा। इन्हीं दबावों के बीच करन कुछ रिश्तेदारों व परिजनों के साथ हिमाचल प्रदेश रवाना हो गया। संवाद
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