चंदौसी/कुढ़फतेहगढ़। कोरोना काल में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर ग्रामीणों की निर्भरता बढ़ी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण व अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बनाए गए स्वास्थ्य उपकेंद्र बदहाल है। टीकाकरण व अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बनियाखेड़ा ब्लाक में बने अधिकांश स्वास्थ्य उपकेंद्र देखरेख के अभाव में जर्जर हो गए और अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं।
बनियाखेड़ा ब्लाक क्षेत्र में 28 स्वास्थ्य उपकेेंद्र बने हैं। उनका निर्माण हुए दस वर्ष से अधिक का समय हो गया। पैक्सपैड संस्था ने इनका निर्माण किया था। एक केंद्र के निर्माण में 8.50 लाख रुपये की लागत आई थी। ब्लाक क्षेत्र के गांव बलकरनपुर में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र काफी समय से बंद हैं। उसकी दीवार टूटने लगी है। टीकाकरण के लिए एएनएम गांव में प्रधान के घर अथवा आंगनबाड़ी केंद्र पर बैठ कर करती है।
गांव छाबड़ा में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र पूरी तरह से जर्जर हालत में खड़ा है। अंदर के खिड़की दरवाजे टूटे हैं। बाहर दरवाजे पर बड़ी बड़ी घास खड़ी है। घास व झाड़ी उगने के कारण अंदर जाने का रास्ता ही बंद हो गया।
गांव राजथल में स्वास्थ्य उपकेंद्र की हालत ठीक है, पर ताला लटका रहता है। एएनएम टीकाकरण के लिए कभी भी इस केंद्र पर नहीं आती है।, गांव दारनी में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र खड़हर की स्थिति में पहुंच गई। दरवाजे व खिड़की गायब है। फर्श टूटा हुआ है। दारनी में बना उप स्वास्थ्य केंद्र भी खंडहर की स्थिति में बंद पड़ा रहता है सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है