संभल। शिव गोरख युवा वाहिनी सेवादल द्वारा प्राचीन सिद्धपीठ पातालेश्वर महादेव पक्का बाग सरायतरीन में चल रही योगेश्वर भगवान श्री गोरखनाथ अमर गाथा के दूसरे दिन राधेश्याम श्रीमाली ने कहा कि हमारे देश भारत वर्ष में चली आ रही गुरु, शिष्य परंपरा चेतना की अखंड धारा बनकर उभरी है।
कहा कि गुरु, शिष्य परंपरा की शुरुआत आदिकाल से ही चली आ रही है। यह गुरु, शिष्य परंपरा से ही संभव हुआ कि सृष्टि के प्रारंभ से ही हमारे ऋषि, मुनि, गुरु, सदगुरु, संत, महात्मा आदि अपने गुरुओं से प्राप्त ज्ञान और दुर्लभ जानकारियां अपने शिष्यों को साझा कर आगे बढ़ाते रहे हैं।
पंडित राधेश्याम श्रीमाली ने कहा कि इस तरह आदि काल से चला आ रहा सनातन धर्म का दिव्य ज्ञान आज तक भारत वर्ष में सुरक्षित रह सका है। हम अपने गुरुओं के तन, मन, वचन से ऋणी हैं कि हम युग युगांतरों से चले आ रहे सनातन धर्म के दिव्य को गुरु, शिष्य परंपरा से ही जान पाए। इस दौरान सतीश चंद्र, दौलत राम, डॉ. विकास सैनी, नरेश कुमार, नितिन मिश्रा, महंत जुगल किशोर मिश्रा, कल्लूराम आदि रहे। संवाद