संभल। देहात क्षेत्र में फसलों की मुफ्त में सिंचाई के लिए स्थापित कराए गए राजकीय नलकूपों की स्थिति बेहद खराब है। जिले में कई नलकूप खराब पड़े हैं। कोई नलकूप करीब 10 साल से बंद है तो कोई दो साल से खराब पड़ा है। जिससे क्षेत्र में फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। किसान फसलों की सिंचाई के लिए परेशान हैं। ऐसे में तमाम किसान निजी नलकूपों से फसलों की सिंचाई कराने के लिए मजबूर हैं। किसानों का दावा है कि वह लगातार शिकायत करते हैं लेकिन सुधार नहीं किया जा रहा है। एक्सईएन नलकूप का दावा है कि वह लगातार नलकूपों की निगरानी कराते हैं और इसकी जिम्मेदारी क्षेत्रवार जेई को दे रखी है।
जिले में 581 नलकूप हैं। इन पर 230 ऑपरेटर की तैनाती है। जिले को जोन व खंड के रूप में बांटा गया है। एसडीओ और जेई निगरानी करते हैं। इस व्यवस्था के बाद भी 20 से ज्यादा नलकूप ऐसे हैं जिनका रिबोर होना है। अब बजट का अभाव है तो रिबोर नहीं हो पा रहा है। इसलिए किसानों की फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
असमोली क्षेत्र के गांव ओबरी और पवांसा क्षेत्र के गांव दिलगौरा और किरारी में ऐसे राजकीय नलकूप सामने आए हैं जो खराब पड़े हैं और इनका किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रही है। सैकड़ों किसान इस समस्या से जूझ रहे हैं। किसानों का कहना है कि खराब नलकूपों को लेकर शिकायत की गई थी लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। अगर नलकूप सही होते तो फसलों की मुफ्त में सिंचाई हो जाती लेकिन इसे लेकर गंभीरता का माहौल नहीं है। इसलिए निजी नलकूप ही सहारा हैं लेकिन वह सिंचाई ज्यादा समय में करते हैं और इससे खर्च बढ़ जाता है। एक्सईएन नलकूप का कहना है कि जहां नलकूप रिबोर होने हैं उनकी रिपोर्ट तैयार कराकर बजट की मांग की जाएगी। पिछले वित्तीय वर्ष में तीन नलकूप का रिबोर ही हो सका था।
सरकारी नलकूप ने वर्ष 2015 में पानी देना बंद कर दिया था। जिसकी शिकायत भी की गई लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। नलकूप बंद होने से दिक्कत हो रही है। अली वारिस,ओबरी
सरकारी नलकूप काफी समय से बंद है। किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। नलकूप का कोई लाभ नहीं मिल रहा। निजी नलकूप से फसल की सिंचाई करनी पड़ती है। कल्लू, ओबरी
सरकारी नलकूप करीब दो वर्ष से अधिक से खराब पड़े हैं। जिन्हें सही नहीं कराया गया। अगर यह नलकूप सही होते तो किसानों की फसलों की सिंचाई मुफ्त में हो सकती थी। गंभीर सिंह यादव, दिलगौरा
सरकारी नलकूप करीब 4 वर्ष से खराब पड़ा है। जिसे सही करने के लिए कई बार शिकायत की गई। फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। किसान अपने खर्च पर सिंचाई करते हैं। बृजेश यादव, किरारी
नलकूपों के संचालन को लेकर जेई निगरानी करते हैं। कहीं कोई खराब होता है तो सही करा दिया जाता है। इस तरह का कोई मामला संज्ञान में नहीं है। यदि कहीं खराब है तो उन्हें सही करवाया जाएगा। रिबोर कराने के लिए रिपोर्ट तैयार कराएंगे।
नीरज गुप्ता, अधिशासी अभियंता, नलकूप।