अगर कोई अड़चन नहीं पड़ी तो संभल जिले की राजस्व सीमाओं में वर्ष 2018 में बदलाव हो जाएगा। जनपद संभल से 50 गांव कट जाएंगे। इसमें 23 गांव अमरोहा तथा 27 गांव मुरादाबाद जनपद में शामिल किए जाने का प्रस्ताव है।
राजस्व परिषद में यह प्रस्ताव अंतिम दौर में है। परिषद ने संभल, मुरादाबाद और अमरोहा जनपदों के अधिकारियों से सभी आपत्तियों को निस्तारित करके प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया के आदेश दिए हैं। मुरादाबाद जिले की संभल और चंदौसी तथा बदायूं जिले की गुन्नौर तहसील को शामिल कर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 29 सितंबर 2011 को भीमनगर नाम से नए जिले का गठन किया था।
बाद में इस जनपद का नाम संभल कर दिया गया। जनपद गठन के साथ ही संभल तहसील के असमोली ब्लाक की मढ़न और गुमसानी न्याय पंचायत के 27 गांव की जनता ने विरोध शुरू कर दिया था। इन गांव के लोग संभल के स्थान पर मुरादाबाद में ही बने रहना चाहते थे।
अपनी मांग को लेकर ग्रामीण आंदोलित हो गए थे। उन्होंने विधान सभा चुनाव के वक्त यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसी तरह से नेकपुर न्याय पंचायत के ग्रामीण भी अपने गांवों को अमरोहा जिले में शामिल करने की मांग कर रहे थे जिसे शासन ने सिद्धांतत: मान लिया।
राजस्व परिषद ने अमरोहा तथा संभल के जिलाधिकारी को पत्र भेज कर कहा है कि प्रस्ताव के अंतिम रूप दिया जाए। राजस्व परिषद के भूमि व्यवस्था आयुक्त भीष्म लाल शर्मा ने संभल और अमरोहा के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कहा है कि दोनों जनपदों के जिलाधिकारी 23 गांवों को अपने- अपने जनपद के मानचित्रों में लाल रंग से चिह्नित कराएं। इसके बाद मानचित्र को राजस्व परिषद के पास भेेेजें तथा जो आपत्तियां आईं हैं उनका भी निस्तारण करें।