आजादी का अमृत महोत्सव पूरे देश में उत्साह के साथ मनाए जाने की तैयारी है। हर घर तिरंगा अभियान इस महोत्सव की विशेषता होगी। सरकारी कार्यालय सजाए जाएंगे। इसके लिए शासन की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं, जिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के दम पर देश को आजादी मिली है उनकी अनदेखी की जा रही है। जिले के पंवासा ब्लॉक परिसर में लगे शिलापट पर स्वतंत्रता सेनानियों के नाम तक अंकित नहीं है। शिलापट पर पहले जो नाम दर्ज किए गए थे वो पेंट कराए जाने की वजह से मिट गए हैं। जिम्मेदार जानकारी न होने की बात कह रहे हैं।
पवांसा निवासी ओमकार सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उनके पुत्र भूराज सिंह का कहना है कि पूरे देश में आजादी का महोत्सव मनाने की जोरदार तैयारी है। पवांसा ब्लॉक परिसर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम तक अंकित नहीं किए गए हैं। बताया कि पहले नाम अंकित थे लेकिन मिट कैसे गए इसकी जानकारी नहीं है। यह जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाही है। इसी गांव के रहने वाले विजय सिंह भी स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में भागीदार रहे थे। इसकी गवाही ताम्रपत्र देते हैं। विजय सिंह के पोते रामवीर सिंह का कहना है कि उनके दादा ने देश के लिए लड़ाई लड़ी थी लेकिन इस समय कोई सुध नहीं ली जा रही है। जिला प्रशासन से शिकायत करने की बात कही है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रेमपाल का नाम शिलापट पर नहीं हुआ है दर्ज
जिले में स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में भागीदारी करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की संख्या काफी रही हैं। सबसे उम्र दराज स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संभल के मोहल्ला कोटपूर्वी निवासी प्रेमपाल रस्तोगी रहे हैं। उनके बेटे डॉ. वीरेंद्र पाल रस्तोगी का दावा है कि उनके पिता का देहांत करीब 100 वर्ष की उम्र में 13 अगस्त 2020 को हुआ था। देहांत हुए दो वर्ष हो गए लेकिन संभल ब्लॉक परिसर में लगे शिलापट पर अभी उनका नाम दर्ज नहीं किया गया है। खंड विकास अधिकारी सतेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि कुछ लोगों ने मुझसे इस बारे में मुलाकात की थी तब उन्हें बताया गया था कि वह डीएम से मिले और डीएम के निर्देश के बाद ही शिलापट पर नाम अंकित किया जाएगा।
1960 में पवांसा बना था ब्लॉक, 1972 में लगा था शिलापट
पवांसा 1960 में ब्लॉक बना था। उस वक्त यह मुरादाबाद जिले में आता था। 1972 में यहां शिलापट लगाया था, जिस पर लगभग 15 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम अंकित था। पेंट कराए जाने की वजह से अधिकांश स्वतंत्रता सेनानियों का नाम मिट गया है।
मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। शिलापट पर जो नाम लिखे हुए थे उन्हें 15 अगस्त से पहले लिखवा दिया जाएगा।
रिजवान हुसैन, खंड विकास अधिकारी, पवांसा