बबराला। थाना क्षेत्र के गांव शाहजहांनाबाद डांडा में जमीन के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि जमीन बेचने के 21 साल बाद उसी जमीन पर दोबारा नाम दर्ज कराकर बैंक से ऋण ले लिया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चंदौसी के आदेश पर पुलिस ने विक्रेता समेत लेखपाल, तहसीलदार और पीएनबी शाखा नरौरा के अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गांव निवासी विशन सिंह ने बताया कि जावित्री देवी ने 12 जुलाई 2004 को उनके और उनके तीन भाइयों के पक्ष में शाहजहांनाबाद सैलाब और शाहजहांनाबाद डांडा स्थित अपने हिस्से की जमीन का बैनामा किया था। 30 अगस्त 2004 को दाखिल खारिज भी हो गया था। आरोप है कि 2014 में जावित्री देवी ने बैनामा निरस्त कराने के लिए सिविल न्यायालय में वाद दायर किया, जो अभी विचाराधीन है।
इसके बावजूद वर्ष 2024 में उसी जमीन पर दोबारा नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। एफआईआर के अनुसार लेखपाल और तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर नौ जनवरी 2025 को जावित्री देवी का नाम फिर से राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर दिया गया। पांच अप्रैल 2025 को इसी जमीन को आधार बनाकर पीएनबी शाखा नरौरा से ऋण लेने का आरोप है।
मामले की जानकारी होने पर पीड़ित पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई। एसडीएम गुन्नौर ने सुनवाई के बाद छह मार्च 2026 को जमीन को दोबारा खरीदारों के नाम दर्ज करने का आदेश दिया। आरोप है कि पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो उन्होंने न्यायालय की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर थाना बबराला पुलिस ने जावित्री देवी, भूरे सिंह, सुनील समेत संबंधित लेखपाल, तहसीलदार और पीएनबी शाखा नरौरा के अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। थानाध्यक्ष लवनीश चौधरी ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है।