संभल। जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान 24 नवंबर को हुए बवाल में जान गंवाने वाले तुर्तीपुर इल्हा निवासी मोहम्मद कैफ के पिता मोहम्मद हुसैन और उसके चाचा मोहम्मद मारूख ने बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार के समक्ष लिखित बयान दर्ज कराए। मृतक के पिता का कहना है कि उन्हें इंसाफ चाहिए, जबकि मोहल्ला कोटगर्वी निवासी मोहम्मद नईम के परिजन बयान दर्ज कराने के लिए नहीं पहुंचे। अब उन्हें दोबारा बयान दर्ज कराने का अवसर नहीं मिलेगा। सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि बुधवार को बयान दर्ज कराने और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए अंतिम अवसर दिया गया था, लेकिन एक ही मृतक के परिजन बयान दर्ज कराने के लिए पहुंचे। यह जांच जल्द ही पूरी कर डीएम को सौंपी जाएगी। उन्होंने बताया कि मजिस्ट्रियल जांच में तीन मृतकों के परिजनों के बयान दर्ज किए जाने का आदेश मिला था, जिसमें दो मृतकों के नाम दिए गए थे और तीसरे मृतक का नाम नहीं था, लेकिन बयान दर्ज कराने के लिए सभी को कहा गया था। इसमें मृतक के परिजन व बवाल को देखने वाले लोग भी अपने बयान दर्ज कराने के साथ साक्ष्य दे सकते थे, लेकिन शाम पांच बजे तक कोई नहीं पहुंचा। जबकि यह अंतिम अवसर था। इसके लिए पहले से ही सूचना सार्वजनिक की गई थी।
00000000
बाजार गया था मोहम्मद कैफ, आई मौत की खबर
मोहम्मद हुसैन ने बताया कि उनका बेटा मोहम्मद कैफ 24 नवंबर की सुबह 8: 30 बजे बाजार करने के लिए नूरियो सराय के लिए निकला था, बाजार नहीं लगा। उसके बाद मोहम्मद कैफ लौटकर नहीं आया। हमें करीब चार बजे सरकारी अस्पताल से पता चला। दरोगा का फोन आया कि यहां आ जाइये, आपके बेटे की मौत हो गई है। उसके बाद हम वहां पहुंचे। बहजोई गए तो वहां शव मिला, जिसके बाद शव सुपुर्द ए खाक कर दिया। मोहम्मद हुसैन ने कहा कि इस मामले में इंसाफ दिलाया जाए। मेरे बेटे का कोई गुनाह नहीं था। संवाद
बवाल में पांच लोगों की गई थी जान, चार के परिजनों ने दर्ज कराई थी हत्या की रिपोर्ट
बवाल में पांच लोगों की जान गई थी। इसमें तुर्तीपुर इल्हा निवासी मोहम्मद कैफ, कोटगर्वी निवासी नईम, अयान, सरायतरीन निवासी बिलाल और हयातनगर निवासी रोमान शामिल थे। रोमान के परिजनों ने बिना किसी कार्रवाई के शव सुपुर्द ए खाक कर दिया था, जबकि अन्य चार मृतकों के परिजनों ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने छानबीन की तो शारिक साठा गिरोह का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने हत्या के मामले में गुलाम, वारिस और मुल्ला अफरोज को गिरफ्तार किया था। इन आरोपियों के पास से पिस्टल आदि भी बरामद की थीं।
00000000000
अधिकारियों के भी दर्ज हुए थे बयान
पूर्व में डिप्टी कलेक्टर दीपक चौधरी मजिस्ट्रीयल जांच कर रहे थे। एसडीएम संभल, सीओ के अलावा नखासा और कोतवाली के प्रभारी के बयान दर्ज हो चुके हैं। जिला अस्पताल के कर्मचारियों ने भी अपने बयान दर्ज कराए थे। जांच पूरी होने से पहले ही डिप्टी कलेक्टर का तबादला जिले से बाहर हो गया था। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार को मजिस्ट्रीयल जांच सौंपी गई थी। अब मृतकों के परिजन व संबंधियों के बयान दर्ज किए जाने थे और उनके पास यदि कोई साक्ष्य है तो उसको प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था।
00000000000000
कोट
मजिस्ट्रीयल जांच हमें डीएम द्वारा सौंपी गई थी। इसमें मृतकों के परिजनों को अंतिम अवसर दिया गया था, लेकिन एक ही मृतक के परिजन बयान दर्ज कराने के लिए पहुंचे। यह जांच रिपोर्ट अब अंतिम चरण में है। अब किसी को बयान दर्ज कराने या साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर नहीं मिलेगा। यह जांच रिपोर्ट जल्द ही पूरी कर दी जाएगी। -सुधीर कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट, संभल।