बहजोई (संभल)। जहां सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से वन डिस्टि्रक वन रिवर के तहत एक जिला एक नदी के जीर्णोद्धार का आह्वान किया गया है। वहीं, जिला संभल में वन डिस्टि्रक फाइव रिवर के तहत जिले में पांच नदियों के जीर्णाेद्धार पर काम चल रहा है। यह बात डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने कही। वह बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में प्रेसवार्ता कर रहे थे।
डीएम ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि जिले में सोत नदी समेत महावा, अरिल, वर्दमार व महिष्मति नदी के जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिष्मति को भैंस नदी भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि बीते दिनों सोत नदी को लेकर प्रधानमंत्री की ओर से भी मन की बात में जिक्र किया गया है। इसके अलावा नदियों के किनारों पर सहजन व बांस के पौधों का रोपण भी किया जाएगा।
डीएम ने बताया कि सोत नदी जिले में सबसे लंबी नदी है। इसकी लंबाई करीब 112 किलोमीटर लंबी है। यह नदी अमरोहा से जिले में संभल के गांव मातीपुर से प्रवेश करती है। यह गंगा नदी की सहायक नदी है। जल संचयन व संरक्षण के लिए सोत नदी ब्लॉक असमोली, संभल, पवांसा, बहजोई व बनियाखेड़ा की 71 ग्राम पंचायतों को लाभ पहुंचाएगा। वहीं, करीब 42 किलोमीटर लंबी महावा नदी ब्लॉक रजपुरा के गांव सिरसा के निरियावली से शुरू होकर गुन्नौर के गांव मझोला फतेहपुर से होते हुए जुनावई के गांव पुसावली होते हुए जिला बदायूं में प्रवेश करती है। यह जिले के 38 गांवों से होकर गुजरती है। इसका करीब 12 किलोमीटर का जीर्णोद्धार का कार्य पूर्ण पूरा हो गया है। इसके अलावा करीब 23 किलोमीटर लंबी अरिल नदी वर्तमान में पूर्ण रूप से विलुप्त है और इसका उद्गम स्थल ब्लॉक असमोली के गांव गुमसानी से होता है। यह गांव ढाक शहीद से बहकर जिला मुरादाबाद में प्रवेश करती है। इसके बाद जिला संभल के ब्लॉक बनियाखेड़ा के गांव अकरौली में बहती है। यह नदी 19 गांवों से होकर गुजरती है। इसका करीब 9 किलोमीटर का जीर्णोद्धार कार्य पूरा हो चुका है। शेष गांवों में कार्य चल रहा है।
डीएम ने कहा कि करीब 14 किलोमीटर लंबी वर्दमार नदी भी विलुप्त हो चुकी है। यह नदी 11 गांवों से होकर गुजरती है। इस पर भी जीर्णोद्धार कार्य चल रहा है। इसके अलावा महिष्मति नदी जिले के प्राचीन 87 तीर्थों में से एक है। मणिकर्णिका तीर्थ के समीप खुदाई करते हुए नदी के बहाव क्षेत्र की अपस्ट्रीम व डाउनस्ट्रीम का सर्वे कार्य शुरू हुआ है। इसके जीर्णोद्धार के लिए प्रसिद्ध पर्यावरण विज्ञानी नदी विशेषज्ञ व नमामि गंगे के सलाहकार प्रोफेसर डॉ. वेंकटेश दत्त की देख रेख में अपस्ट्रीम से लेकर डाउनस्ट्रीम तक के क्षेत्र का नगरपालिका व तहसील प्रशासन के साथ स्थलीय सर्वे किया जा चुका है। इसकी डीपीआर तैयार हो रही है। इसके अलावा राजस्थान निवासी राजेंद्र सिंह के सुझाव पर वर्षा जल संरक्षण के लिए मनरेगा के माध्यम से गौशालाओं व अन्य स्थानों पर ट्रेंच भी बनाए जाएंगे।