संभल। गंगा एक्सप्रेस वे के लिए यूपीडा ने जमीन के सर्किल रेट का अनुमोदन कर दिया है। जमीन के बैनामे सोमवार से शुरू कराने की तैयारी है। बैनामे कराने की जिम्मेदारी तहसीलदार और राजस्व कर्मियों को दी गई है। बैनामे के बाद यूपीडा की ओर से किसान के खाते में सर्किल रेट का चार गुना भुगतान पहुंचेगा।
मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाला गंगा एक्सप्रेस वे जिले के 31 गांवों से होकर गुजरेगा। एक्सप्रेस वे बनाने के लिए इन गांवों के किसानों की जमीन के बैनामे कराए जाएंगे। प्रथम चरण में 15 गांवों के किसानों की जमीन के बैनामे सोमवार से शुरू कराने की तैयारी है। अपर जिलाधिकारी कमलेश कुमार अवस्थी ने इसके लिए संभल और चंदौसी के तहसीलदारों को निर्देश दिए हैं। जिन किसानों की जमीन के बैनामे होने हैं, उन किसानों को लेखपाल सूचित करेंगे। चंदौसी तहसील के सात और संभल तहसील के आठ गांवों के किसान अपने क्षेत्र के तहसील मुख्यालय पर स्थित निबंधन कार्यालय पर बैनामे के लिए जाएंगे। जमीन का बैनामा यूपीडा के नाम कराएंगे।
परिसंपत्ति पुरानी है तो कीमत कम मिलेगी
संभल। परिसंपत्तियों के मूल्यांकन का काम पूरा हो चुका है। भूमि की कीमत तो सर्किल रेट से चार गुना मिलेगी। परिसंपत्ति की कीमत का आकलन करते समय संपत्ति पुरानी होने को भी ध्यान में रखा गया है। इसके हिसाब से जो कीमत लोक निर्माण विभाग ने निकाली वही कीमत भूमि के बैनामे के वक्त किसान को मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि अगर परिसंपत्ति पुरानी है तो मूल्य को घटाया जाएगा और कीमत कम मिलेगी। इसके लिए लोक निर्माण विभाग की आकलन रिपोर्ट ही आधार होगी।
पहले चरण में आठ सौ किसानों की जमीन के बैनामे कराने की तैयारी
तहसील संभल के गांव तातरपुर संदल, ईसापुर सुनवारी, सुजातपुर, सहरा, निबौरा, रसूलपुर धतरा, करीमपुर व बसला के किसानों की जमीन के बैनामे एक्सप्रेस वे के लिए कराए जाएंगे। तहसील चंदौसी के गांव रायपुर कलां, धर्मपुर निकट ढाढौल, ढाढौल, राजपुर, बल्लमपुर, मिर्जापुर अख्तरा व अतरासी के चयनित किसानों की जमीन ली जाएगी। इनकी संख्या करीब 800 है।