फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ओलावृष्टि से हुई क्षति को किसान संगठन बनाएंगे मुद्दा, सरकार भी बार-बार करा रही है आकलन

विज्ञापन
विज्ञापन
संभल/बबराला। फसलों के नुकसान की क्षतिपूर्ति मिलने में हो रही देरी से किसान परेशान हैं। अब क्षति को किसान संगठन मुद्दा बनाएंगे। इस बीच राज्य सरकार भी ओलावृष्टि और बारिश हुई क्षति के विषय में बार-बार करा रही है। गुरुवार को रात और सुक्रवाह सुबह हुई बारिश और ओलावृष्टि से हुई क्षति का आकलन करने के लिए शनिवार को राजस्वकर्मियों की टीमें किसानों के खेत तक पहुंची। टीम ने आकलन किया है पर देर शाम आई रिपोर्ट के आधार पर एडीएम ने कहा कि क्षति इतनी नहीं है कि उसके लिए मुआवजे की संस्तुति की जाए। क्षति अधिकतम 14 प्रतिशत तक है जबकि क्षतिपूर्ति 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति होने पर मिलती है।
विज्ञापन

जिले के असमोली, चंदौसी, गुन्नौर क्षेत्र में भी लेखपालों ने खेतवार सर्वे किया है लेकिन कहीं से भी ऐसी रिपोर्ट नहीं आई है जिसमें क्षतिपूर्ति देय हो। जब अपर जिलाधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि बेशक मार्च में कई बार ओलावृष्टि और बारिश हुई है पर क्षति इतनी नहीं है कि उसके बदले कोई क्षतिपूर्ति देने की संस्तुति की जाए लेकिन संभल तहसील के गांवों में 12 व 13 दिसंबर 2019 को जो क्षति हुई थी।
उसके बदले में आर्थिक मदद के लिए शासन को संस्तुति की गई है। जैसे ही मदद की धनराशि प्राप्त हो जाएगी वैसे ही किसानों को उसे मुहैया कराया जाएगा। इसके लिए किसानों की सूची बन चुकी है। सभी किसान संभल तहसील के हैं। इनकी सरसों और आलू की फसल को ओलावृष्टि और बारिश से क्षति हुई थी। भाकियू असली के प्रांतीय पदाधिकारी किसान दीपक शर्मा का कहना है कि आर्थिक मदद के लिए किसान कब तक इंतजार करें। इसका जवाब मिलना चाहिए क्योंकि किसानों को कर्ज अदा करने और घर का खर्च भी चलाना है।
विज्ञापन

क्षतिपूर्ति न मिली तो अनशन पर बैठेंगे
संभल। जिले में ओलावृष्टि से आलू और सरसों की फसलों को भारी क्षति हुई है। एक मोटे आकलन के अनुसार 200 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की क्षति हुई है लेकिन क्षतिपूर्ति अब तक नहीं मिल सकी। इसके लिए अब भाकियू ने आंदोलन का एलान किया है। जबकि अपर जिलाधिकारी का कहना है कि शासन से 12 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मांगी गई है अगर यह धनराशि आती है तो दैवी आपदा मद में किसानों को यह मदद दी जाएगी लेकिन जब तक धरनाशि प्राप्त नहीं हो जाती है तब तक कुछ नहीं कह सकते हैं। भाकियू असली के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह का कहना है कि आर्थिक मदद नहीं मिली तो उनका संगठन आंदोलन करेगा। जरूरत पड़ी तो अनशन भी करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें