2.60 करोड़ की मैटरनिटी विंग में सुविधाएं केवल सामान्य प्रसव की
पांच साल पहले बनी थी बिल्डिंग, अभी तक नहीं मिले चिकित्सक, छह स्टाफ नर्स के हवाले अस्पताल
जटिल प्रसव व ऑपरेशन के लिए गर्भवती को जिला अस्पताल किया जाता है रेफर
चंदौसी (संभल)। सीएचसी परिसर में पांच साल पहले सुरक्षित प्रसव के लिए 2.60 करोड़ रुपये खर्च कर बनाई गई 30 बेड की मैटरनिटी विंग में सुविधाएं सामान्य प्रसव की हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक व स्टाफ के नाम पर केवल छह स्टाफ नर्स, एक लैब टेक्नीशियन और कुछ चिकित्सकीय उपकरण ही मिल पाए हैं। जटिल प्रसव, ऑपरेशन की स्थिति में गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। दूर जाने के बजाए परिजन नर्सिंगहोम में ही प्रसव कराने के लिए मजबूर हैं। करोड़ों की लागत से बनी बिल्डिंग का मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
चंदौसी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सामान्य प्रसव की सुविधाएं दी थी। प्रसव के समय मातृ मृत्यु-दर व शिश मृत्यु दर कम करने के लिए एनएचएम के तहत 14 जून 2013 को सीएचसी भवन में 30 बेड की मैटरनिटी विंग बनाने की स्वीकृति मिली थी। निर्माण कार्य पूरा होने पर एक अक्तूबर 2017 को तत्कालीन राज्यमंत्री समाज कल्याण अनुसूचित जाति, जनजाति गुलाब देवी ने इसका लोकार्पण किया था। मिशन निदेशक से एनएचएम के तहत मैटरनिटी विंग में सुरक्षित प्रसव के लिए ऑपरेशन, सभी प्रकार की जांचें, नवजात शिशु की जांच व इलाज की व्यवस्था की होनी चाहिए। मैटरनिटी भवन का उद्घाटन हुए पांच साल हो गए हैं यहां स्टाफ की तैनाती के नाम पर केवल छह स्टाफ नर्स व एक लैव टेक्नीशियन मिला है। यही स्टाफ सामान्य प्रसव करा रहा है। प्रतिमाह 250 से 300 प्रसव स्टाफ नर्स कराती हैं।
रेफरल सेंटर बनी है मैटरनिटी विंग:
मैटरनिटी विंग में प्रसव, ऑपरेशन की सभी सुविधाएं होनी चाहिए । करोड़ों खर्च के बाद भी कोई सुविधा नहीं है। स्टाफ नर्स व सीएचसी चंदौसी के कुछ स्टाफ को मैटरनिटी विंग में तैनात कर दिया गया है। पहले सीएचसी की बिल्डिंग में सामान्य प्रसव होते थे, अब ढाई करोड़ की बिल्डिंग में सामान्य प्रसव होते हैं। कोई जटिल केस अथवा ऑपरेशन का मरीज आता है तो उसे जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं। स्थानीय मरीजों को मजबूरी में नर्सिंगहोम में सिजेरियन प्रसव कराना पड़ रहा है।
मैटरनिटी विंग में
30 बेड की मैटरनिटी विंग में दो गायनोकोलॉजिस्ट, दो बाल रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीस्ट , रेडियोलॉजिस्ट, एक पैथोलॉजिस्ट होनी चाहिए। इसके अलाव स्टाफ नर्स, वार्ड आया, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की तैनाती भी अनिवार्य है।
बिल्डिंग बनने के बाद आए थे कुछ उपकरण
अस्पताल बनने के बाद मैटरनिटी विंग में स्ट्रेचर, ड्रिपस्टैंड, साइड स्क्रीन, नवजात के इलाज के लिए फोटो थेरेपी मशीन, सक्षम मशीन, वार्मर मिले थे।
यह मिलनी थीं सुविधाएं
जटिल प्रसव व ऑपरेशन की सुविधा, अल्ट्रासाउंड जांच, गर्भवती महिलाओं की रक्त व अन्य प्रकार की जांचे, रक्त व गर्भ संबंधी सभी जांच, प्रसव के बाद कमजोर बच्चों के उपचार की सुविधा (फोटो थेरेपी, वार्मर, नर्सरी) आदि।
तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने किया था शिलान्यास
शासन ने भवन के निर्माण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्टस कारपोरेशन लिमिटेड को सौंपी थी। इसका शिलान्यास 12 जनवरी 2014 को तत्कालीन चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अहमद हसन, स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल माझी, नितिन अग्रवाल ने किया था।
मैटरनिटी विंग में मिशन निदेशक से ही चिकित्सक व अन्य स्टाफ की तैनाती होनी है। पिछले पांच वर्षों से लगातार शासन से चिकित्सक व स्टाफ की डिमांड की जा रही है। शासन स्तर पर भी मानव संसाधनों की कमी के चलते तैनाती नहीं हो पा रही है। अब फिर से शासन को रिमाइंडर भेेेजा जाएगा। डॉ. तरन्नुम रजा, सीएमओ संभल।