चंदौसी। चंदौसी की देशी की सोनपापड़ी का नाम आते ही मुंह में पानी आ जाता है। यहां कि देशी घी की मिठाइयों का स्वाद देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पसंद किया जा रहा है। जिले के साथ साथ आसपास के कई जिलों में चंदौसी की मिठाइयां खरीदकर ले जाई जा रही है। इसके अलावा यहां के जो लोग विदेशों में बसें हैं, वह भी यहां के बाद मिठाइयां साथ ले जाना नहीं भूलते हैं।
चंदौसी अंग्रेजों के जमाने से ही शुद्ध और स्वादिष्ट मिठाइयों के लिए जानी जाती है। बुजुर्ग बताते हैं कि देश की आजादी से पहले जब परगने में कोई अंग्रेज अफसर आता था तो उसके लिए विशेष वाहन से चंदौसी से प्रसिद्ध हलवाइयों से मिठाइयां ले जाई जाती थीं, अंग्रेज खोया निर्मित मिठाइयों को अधिक पसंद करते थे। यहां मिठाइयों के कारोबार को एक सदी से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन चंदौसी के हलवाइयों ने अपनी परंपरागत मिठास को बनाए रखा है। यूं तो पूरे जिले में करीब 170 मिष्ठान विक्रेता है, लेकिन इनमें सर्वाधिक 70 मिष्ठान विक्रेता चंदौसी में ही है। इनमें देशी घी की मिठाइयों को बनाने में कई मिष्ठान विक्रेताओं ने पहचान बनाई है। चंदौसी में तो दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर स्पष्ट रूप से बोर्ड लगाए हैं कि यहां देशी घी की मिठाई मिलती है और यहां डालडा या अन्य घी की लेकिन इसमें चंदौसी की सोनपापड़ी व काजू की बर्फी ने देशभर में विशेष पहचान पाई है। आलम यह है कि जब भी कोई मुसाफिर ट्रेन, बस या निजी वाहन से चंदौसी होकर गुजरता है तो वह यहां की सोनपापड़ी और काजू की बर्फी ले जाना नहीं भूलता है। इतना ही नहीं है, यहां की सोनपापड़ी की मांग विदेशों में भी अच्छी खासी है, यहां के जो लोग विदेशों में रहते हैं, वह जब भी यहां आते हैं तो अपने परिजनों, ईष्ट मित्रों के लिए सोनपापड़ी ले जाना नहीं भूलते हैं।