बिजली विभाग ने इन मीटर की एमआरआई कराई तो कई महीने की रिपोर्ट ऐसी मिली जिसमें खपत ही शून्य पाई गई। इसे बिजली विभाग ने बिजली चोरी माना और सांसद को नामजद करते हुए बिजली चोरी में रिपोर्ट दर्ज कराई। साथ ही 1.91 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगा दिया।
जुर्माने की धनराशि मामले में कई बार सुनवाई हुई लेकिन समाधान नहीं हो सका। मई में बिजली विभाग ने जुर्माना धनराशि की अंतिम रिपोर्ट तैयार कर दी। इसके बाद ही सांसद हाईकोर्ट पहुंचे और बिजली विभाग के द्वारा लगाए गए जुर्माने को चुनौती दी।
इसी क्रम में हाईकोर्ट ने सांसद को छह लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया था। साथ ही नियमित बिल जमा करने के लिए शर्त तय की थी। वहीं, दूसरी ओर बिजली विभाग को छह लाख रुपये जमा होने के बाद तत्काल आपूर्ति बहाल करने का आदेश दिया था।
हम हाईकोर्ट गए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर ही छह लाख रुपये जमा किए हैं। बिजली आपूर्ति बहाल हो गई है। जुर्माना मामले में अगली सुनवाई दो जुलाई को होनी है। हमें हाईकोर्ट पर पूरा भरोसा है। हमारे खिलाफ जो बिजली विभाग द्वारा गलत कार्रवाई की गई है। उसमें हाईकोर्ट से पूरा न्याय मिलेगा। -जियाउर्रहमान बर्क, सांसद, संभल
हाईकोर्ट के आदेश पर सांसद के आवास पर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। नियमित बिजली बिल जमा करने के निर्देश सांसद को दिए गए हैं। - विनोद कुमार, अधीक्षण अभियंता, संभल