चंदौसी। दो साल के कोरोना कॉल के बाद अब विद्यालय पूरी क्षमता के साथ खुलने लगे हैं। सीएचसी चंदौसी के चिकित्सक डॉ. हरवेंद्र सिंह ने बताया कि दो साल कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के बाद अब बच्चे अकेलेपन, अवसाद की ओर जाने लगे हैं। जिससे बच्चे अकेला या एकाकी रहना अच्छा लगने लगा है। तब बच्चे मोबाइल व टीवी देखकर ही समय व्यतीत कर रहे थे।
पढ़ाई ऑनलाइन हो रही थी, अब बच्चों को मोबाइल की आदत पड़ चुकी है। ऐसे में अब स्कूल खुलने पर बच्चों को वापस पटरी पर लाने को अभिभावकों के साथ-साथ शिक्षकों को ज्यादा मेहनत करने पड़ेगी। बच्चों पर पढ़ाई का बोझ न डालें, इससे बच्चे स्कूल आने में नहीं हिचकिचाएंगे। अभिभावक भी बच्चों को कोरोना काल से पहले की तरह व्यवहार करें। स्कूल से घर आने पर भोजन दें और स्कूल में बिताए समय के बारे में पूछे। साथ ही स्कूल का होमवर्क करने को दबाव न बनाए। तभी बच्चे का मन वापस पढ़ाई की तरह हो पाएगा।
ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चे मोबाइल पर निर्भर होकर रह गए थे। वह ज्यादातर अपना समय कमरे में अकेला रहकर ही बिताते थे। मगर स्कूल खुलने पर घर में कोरोना काल से पहले जैसा माहौल बनाने जरूरी है। तभी बच्चे अपनी पटरी पर लौटेंगे।
नकुल कुमार वार्ष्णेय, अभिभावक, चंदौसी
कोरोना काल में घर रहकर बच्चे मानसिक तनाव महसूस करने लगे थे। किसी साथ समय बिताना अच्छा नहीं लगा था। अब स्कूल खुलने पर कुछ आजादी मिलने से उनकी मानसिक स्थिति में सुधार होगा। अब बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करना आवश्यक है।
गौरव कुमार, अभिभावक, चंदौसी
कोरोना संक्रमण के दौरान घर से आसपास रहने वाले लोग संक्रमित हुए थे। जिससे डर का माहौल हो गया था। जिस कारण किसी बात करना अच्छा नहीं लगता था। अब स्कूल खुलने पर दोस्तों से मिलकर अच्छा लग रहा है।
अनुष्क गुप्ता, छात्र, चंदौसी
कोरोना संक्रमण के दौरान पढ़ाई करने की आदत छूट गई थी। ऑनलाइन शिक्षण व्यवहार के दौरान ज्यादा कुछ समझ में नहीं आता है। अब स्कूल खुलने पर तनाव महसूस हो रहा है।
शुभागिनी, छात्रा, चंदौसी
दो वर्ष बाद स्कूल खुलने पर बच्चों की मानसिकता के हिसाब से अभिभावक व्यवहार करें। उन्हें जिस विषय का होमवर्क पहले करने में दिलचस्पी हो, करने देना चाहिए। अभी कुछ दिन बच्चों पर पढ़ाई का ज्यादा बोझ जा डाला जाए। बच्चों को मानसिक रूप से ठीक होने पर समय लगेगा। इसमें बच्चों के साथ अभिभावकों व शिक्षकों को ज्यादा मेहनत करने की जरूरत पड़ेगी। इसके बाद ही बच्चे पहले की तरह पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू कर देंगे।
डा. हरवेंद्र सिंह, एमओआईसी, सीएचसी, चंदौसी